यूपी के मेरठ में फलावदा कस्बा चौकी पर तैनात सिपाही अंकुर चौधरी की हत्या का खुलासा करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में प्रेस वार्ता कर एसपी देहात राजेश कुमार और एएसपी क्राइम सतपाल सिंह ने बताया कि 11 सौ मोबाइल नंबर और 80 संदिग्धों की पड़ताल के बाद हत्यारोपी हत्थे चढ़ा। आगे स्लाइड्स में जानें कैसे एक मुखबिर ने ही ले ली सिपाही की जान: -
अंकुर मर्डर केस: 1100 मोबाइल नंबर और 80 संदिग्धों की पड़ताल के बाद हत्थे चढ़ा सिपाही का हत्यारा
यहां एसपी देहात राजेश कुमार ने बताया कि झूठी सूचना पर सिपाही द्वारा गाली-गलौज करने से क्षुब्ध होकर उसने हत्याकांड को अंजाम दिया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचा घटना वाले दिन ही मौके से बरामद कर लिया था।
झिंझाना, शामली के गांव मंगलौरा निवासी अंकुर चौधरी पुत्र राजकुमार फलावदा कस्बा चौकी पर तैनात था। 10 जनवरी की देर रात दो गोली मार कर अंकुर की हत्या कर दी गई थी। सुबह को शव चौकी से 700 मीटर दूर ईख के खेत में पड़ा मिला था।
सिपाही की हत्या के बाद पुलिस में हड़कंप मच गया था। घटना के राजफश के लिए थाना पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच, सर्विलांस और एफएसएल टीम को भी लगाया गया था। एसपी देहात ने बताया कि पुलिस की चार टीमों ने करीब 11 सौ मोबाइल नंबरों की पड़ताल की तथा 80 संदिग्धों से पूछताछ की।
इसके बाद पता चला फलावदा का ही आमिर पुत्र शाहिद, सिपाही अंकुर का खास मुखबिर था। गोकशी, शराब तस्करी सहित कई मामलों का राजफाश उसने सिपाही के द्वारा कराया था। एसपी देहात ने बताया कि एक जनवरी को सिपाही ने चार लोग पकड़े थे, जिनसे तमंचा भी बरामद हुआ था। तमंचा कभी सिपाही अंकुर तो कभी मुखबिर आमिर के पास रहता था।