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UP NEWS: जेल में आशीष मिश्र ने जागकर काटी पहली रात, चेहरे पर दिखी बेचैनी, कोई मुलाकात करने भी नहीं पहुंचा
Mon, 11 Oct 2021 09:49 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 11 Oct 2021 09:49 AM IST
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लखीमपुर खीरी बवाल
- फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कांड के मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री का पुत्र आशीष मिश्र मोनू जिला जेल की बैरक संख्या 21 में है। वहां उसे शनिवार की रात करीब सवा बजे शिफ्ट किया गया। जेल सूत्रों के मुताबिक शनिवार की रात उसने उलझन और बेचैनी में गुजारी। वह रात भर सोया नहीं। रात सवा बजे जिला जेल में दाखिल होने के बाद आशीष के चेहरे पर बेचैनी और उलझन के भाव साफ दिखाई दिए। जेल सूत्रों के मुताबिक पिता के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री होने के बावजूद आशीष के पास जिला जेल में दाखिल होते समय सोने-चांदी की कोई भी कीमती या अमानती वस्तु नहीं थी। मोबाइल तो पर्यवेक्षण समिति वालों ने पहले ही ले लिया था। जेब भी खाली थी। जेल में दाखिले के बाद जेल के डॉ. सुनील अजय ने उसे मेडिकल चेकअप के लिए बुलाया तो आशीष ने बताया कि पुलिस पहले ही उसका मेडिकल करा चुकी है। लेकिन जेल मैनुअल का हवाला देकर जेल प्रशासन ने दोबारा मेडिकल कराया, उसमें भी वह फिट निकला।
लखीमपुर जेल के बाहर तैनात पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान इसी केस में जिला जेल अस्पताल में बंदी बने लवकुश और आशीष पांडेय भी वहां थे, लेकिन उनकी आशीष से मुलाकात नहीं हो सकी। कोविड 19 प्रकोप के बाद जिला जेल में बनाई गई विशेष बैरक नंबर 21 में आशीष को करीब 1:30 बजे शिफ्ट कर दिया गया।
आशीष मिश्रा गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
जेल में सुबह बंटा था दलिया, कोई नहीं पहुंचा मुलाकात करने
जेल सूत्रों ने बताया कि सुबह नाश्ते में सभी बंदियों को रविवार होने के कारण दलिया दिया गया था। आशीष के हिस्से में भी एक कटोरी दलिया आया। दोपहर को भोजन भी किया, लेकिन मुलाकातियों की सूची के नाम पुकारे गए तो आशीष को मायूसी ही हाथ लगी। उससे मिलने कोई सगा संबंधी, मित्र या समर्थक नहीं पहुंचा था।
जेल सूत्रों ने बताया कि सुबह नाश्ते में सभी बंदियों को रविवार होने के कारण दलिया दिया गया था। आशीष के हिस्से में भी एक कटोरी दलिया आया। दोपहर को भोजन भी किया, लेकिन मुलाकातियों की सूची के नाम पुकारे गए तो आशीष को मायूसी ही हाथ लगी। उससे मिलने कोई सगा संबंधी, मित्र या समर्थक नहीं पहुंचा था।
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आशीष मिश्र गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
दस दिनों बाद ही होगा मुलाहिजा
वैसे तो नए बंदी के जेल में प्रवेश के बाद उसे मुलाहिजा बैरक में रखा जाता है, जहां पहले उसका सघन शारीरिक परीक्षण करने के बाद शरीर पर बने चोट, जख्म और चिह्नों को दर्ज करने के साथ ही शारीरिक विशिष्टयों का अंकन होता है। अंगुष्ठ चिह्न से लेकर चेहरे के तिल को भी दर्ज किया जाता है। इसके साथ ही उससे जुड़ी व्यक्तिगत जानकारियां भी दर्ज की जाती हैं कि उसके दोस्त कौन हैं, क्या पेशा है।
वैसे तो नए बंदी के जेल में प्रवेश के बाद उसे मुलाहिजा बैरक में रखा जाता है, जहां पहले उसका सघन शारीरिक परीक्षण करने के बाद शरीर पर बने चोट, जख्म और चिह्नों को दर्ज करने के साथ ही शारीरिक विशिष्टयों का अंकन होता है। अंगुष्ठ चिह्न से लेकर चेहरे के तिल को भी दर्ज किया जाता है। इसके साथ ही उससे जुड़ी व्यक्तिगत जानकारियां भी दर्ज की जाती हैं कि उसके दोस्त कौन हैं, क्या पेशा है।
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आशीष मिश्र गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
कौन-कौन रिश्तेदार हैं। उनके नाम पते क्या हैं। व्यक्तिगत जानकारियों से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर बंदी से काम लेने और उसे जेल में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सेदारी देने, विशिष्ट बैरक में रखने आदि पर निर्णय होता है। लेकिन कोविड संक्रमण का दौर आने के बाद वर्तमान व्यवस्था में जेल में बैरक नंबर 18, 19, 20, 21 और 22 को क्वारंटीन बैरक में दस दिन तक रखा जाता है।