पुलिस चाहे कहीं की भी हो अपनी बदनामी से जुड़े एक मुहावरे को अक्सर चरितार्थ करती रहती है। उसके बारे में कहा जाता है कि वह सांप को रस्सी और रस्सी को सांप बनाने में माहिर होती है। कुछ ऐसा ही लखीमपुर मामले में देखने को मिला है। पहले पुलिस हत्या को आत्महत्या बताती रही लेकिन जब बाद में रिपोर्ट में सच कुछ निकला तो अपना स्टैंड बदल लिया। यही नहीं उसने लड़कियों के चरित्र को भी अपने झूठ की भेंट चढ़ा दिया।
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लखीमपुर खीरी कांड में पकड़े गए आरोपी
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सगी बहनों की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को पुलिस अधिकारी शुरू से ही आत्महत्या बताने की कोशिश रहे। इस बात से शायद कानून व्यवस्था की नाकामी छिप जाती। मौत के हालात साफ थे। ग्रामीण गुस्से में थे। अंतत: सुबह एसपी संजीव सुमन को पोस्टमार्टम से पहले ही बताना पड़ा कि दुष्कर्म के बाद हत्या की गई।
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lakhimpur kheri case
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस महकमे के अफसरों के बयान ने महिला अपराधों के खिलाफ पुलिस की संवेदनशीलता को बेनकाब कर दिया। पानी की तरह साफ दिखने वाली घटना को किस तरह से मोड़ने का प्रयास किया। लोगों का गुस्सा बढ़ता गया और पुलिस धाराएं बढ़ाती गईं। दलित उत्पीड़न की धारा बाद में बढ़ाई। अगवा करने की धारा अब तक नहीं बढ़ाई गई।
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बुधवार को जैसे ही मां के सामने से उसकी बेटियों को अगवा किया। पीड़ित ने 112 नंबर सूचना दी। पुलिस पहुंची भी। लेकिन इसके बाद सक्रियता नहीं दिखाई गई। जैसे ही ग्रामीणों को खेत में शव मिला और मौत की खबर फैली तो पुलिस भागी। इसके बाद पुलिस आत्महत्या की बात बार-बार कहने लगी।
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- फोटो : अमर उजाला/एएनआई
एसपी संजीव सुमन ने मीडिया के सामने अधिकृत बयान दिया कि प्रथम दृष्टया आत्महत्या लग रही है। क्यों आत्महत्या है, इस बात का उनके पास कोई तर्क नहीं था। आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह ने भी पीड़ितों के आंसू जरूर पोंछे लेकिन घटना की बाबत उनका भी यही कहना रहा कि प्रथमदृष्टया आत्महत्या व हैंगिंग की बात लग रही है। हालांकि पुलिस अधिकारी बहुत हल्के में इस बात को भी कहते रहे कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।