विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन शासन स्तर से कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करके लोगों को एड्स के बारे में जागरूक भी किया जाता है। एड्स जैसी घातक बीमारी से बचाव का पहला रास्ता यही है कि सभी को जागरूक होना चाहिए, साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करना चाहिए। पिछले दिनों सूबे के एक जिले में एड्स के काफी संख्या में आए मामलों ने आलाधिकारियों की नींद उड़ा दी थी।
आगे की स्लाइड में पढ़िए वो मामले जिन्होंने जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश में सनसनी फैली दी थी।
परदेस से कमाई कर लाैट रहे पति 'एेसे बना रहे हैं पत्नियाें काे एचअाईवी का शिकार'
यूपी के उन्नाव जिले में ये ऐसे मामले सामने आए थे जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी थी।
केस नंबर 1- झाेलाछाप डाॅक्टर के इंजेक्शन लगाने से कई लाेग एचअाईवी के शिकार हाे गए थे जबकि नाकाे टीम अाैर उन्नाव के डीएम का बयान सुर्खियों में छाया हुअा था। 'टीम अाैर उन्नाव डीएम के अनुसार एक इंजेक्शन इतने लाेगाें काे एचअाईवी का शिकार नहीं बना सकता है। दिल्ली, मुबई सहित अन्य महानगरों से लौटने वाले ग्रामीण कमाई के साथ एचआईवी का वायरस भी लेकर लौट रहे हैं। 'बांगरमऊ कस्बे और आसपास के गांवों में एचआईवी के 76 मरीज मिलने पर वजह जानने आई राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण सोसायटी (नाको) टीम ने भी इस बात को स्वीकार किया था।
10 रुपये में इलाज के बदले इतनाें काे मिली लाइलाज बीमारी, 1 दिन में करता था 100 लाेगाें का शिकार
केस नंबर 2- यूपी के उन्नाव जिले में एक के बाद एक एचअाईवी के राेगी सामने अाने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया था। एक सिरिंज कई मरीजों को लगाने से एड्स फैलाने की जद में आए झोलाछाप राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया था। बांगरमऊ के शिवबख्शखेड़ा निवासी राजेश कस्बे के स्टेशन रोड पर दस रुपये में इलाज करता था। दस रुपये के बदले वह मरीजों को तीन खुराक दवा के साथ एक इंजेक्शन भी लगाता था। बड़ी संख्या में बच्चों और बड़ों में एचआईवी की पुष्टि होने के बाद लोग झोलाछाप राजेश के बारे में खुलकर बोलने लगे थे।
मरीज काेई भी हाे तीन खुराक दवा के साथ एक इंजेक्शन अाैर मिल जाएगी यह लाइलाज बीमारी
केस नंबर 3- एचआईवी मामले में एक झोलाछाप काे गिरफ्तार किया गया था। जहां खुलासा हुआ था कि मरीज काेई भी हाे अाैर बीमारी कैसी भी हाे सभी के लिए तीन खुराक दवा और एक इंजेक्शन जरूरी था। इसी इंजेक्शन ने पता नहीं कितनाें काे एड्स जैसी लाइलाज बीमारी का शिकार बना दिया था।
यूपी के इस शहर में फैली है 'एड्स की दहशत', जानिए कैसे 56 लोगों में फैला ये रोग
केस नंबर 4- जिले के बांगरमऊ में एक साल के अंदर एचआईवी के 56 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप था। इस बीमारी से आशंकित लोगों को आईसीटीसी सेंटर पहुंचने की सलाह दी गई थी। बांगरमऊ में लगातार सामने आते एचआईवी पीड़ितों की संख्या का कारण एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा एक ही सिरिंज से कई लोगों को इंजेक्शन लगाना बताया गया था। इसी क्षेत्र के एचआईवी पीड़ित ने एक झोलाछाप के एक ही सिरिंज का कई मरीजों पर प्रयोग करने की शिकायत भी की थी।