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जानकर चौंक जाएंगे आखिर क्यों बरस रहे हैं ओले...
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 27 Jan 2017 04:52 PM IST
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बरस रहे ओले
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी में तेज बारिश के साथ ओलों का गिरना कोई सामान्य घटना नहीं है। जानकारों ने इसे किसानों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक बताया है।
पानी की बूंद का आकार गोल
ओले गिर रहे
- फोटो : अमर उजाला
जब पानी एक बूँद के रूप में गिरता है तो पृष्ठ तनाव के कारण पानी की बूंद का आकार गोल हो जाता है। ठीक इसी तरह जब आसमान से पानी गिरता है तो वह बूँद के रूप में होता है, जोकि गोल होती है। जब तापमान शून्य से कम होता है तो ये गोल बूँदें ही बर्फ बन जाती हैं।
आगे की स्लाइड में, ये है कारण...
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बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े
ओलों की चादर से ढकी सीढ़ियां
- फोटो : अमर उजाला
कई बार इनमें बर्फ की कई सतहें होती हैं, जिसके कारण ये बड़े आकार के ओले के रूप में गिरती हैं। अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े गिरने लगते हैं, जिन्हें हम ओले यानि हेल स्टोर्म कहते हैं।
आगे की स्लाइड में, वो बर्फ बन जाता...पानी भाप बनकर ऊपर उठता रहता है
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तापमान शून्य से कम होने पर गिरती बर्फ
कानपुर के बिठूर में गिरे ओले
बर्फ पानी की ही एक अवस्था है और यह पानी के जमने से बनती है। जब भी पानी का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस या इससे कम हो जाता है तो वो बर्फ बन जाता है।
आगे की स्लाइड में, पानी भाप बनकर ऊपर उठता रहता है...
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धीरे-धीरे और पानी जमता जाता है
ऐसे गिरे औरैया में ओले
- फोटो : अमर उजाला
वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया के द्वारा नदियों, तालाबों, झीलों और समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठता रहता है, जिसके फलस्वरूप बादल बनते रहते हैं। यही बादल बारिश करते हैं। जब आसमान में तापमान शून्य से कई डिग्री कम हो जाता है तो वहां हवा में मौजूद नमी संघनित हो जाती है और यह पानी की छोटी-छोटी बूंदों के रूप में जम जाती है। इन पर धीरे-धीरे और पानी जमता जाता है और अंततः ये बर्फ के गोल टुकड़ों का रूप धारण कर लेती हैं।
आगे की स्लाइड में, जब इनका बढ़ जाता है वजन...
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