विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई के मामले में एसआईटी प्रमुख एसआर भुसरेड्डी के सामने अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट सौरभ भदौरिया व तत्कालीन डीआईजी अनंतदेव राम तिवारी का सोमवार को आमना-सामना हुआ। सौरभ के आरोपों पर अनंतदेव ने एसआईटी के सामने अपना पक्ष रखा।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, सौरभ ने जय बाजपेई, उसकी पत्नी व भाइयों के अलावा गैंग से जुड़े अन्य लोगों की संपत्तियों से संबंधित रजिस्ट्रियों का ब्योरा एसआईटी को सौंपा। रेलवे की सरकारी संपत्ति पर कब्जे के भूलेख भी दिए। साथ ही जय के गैंग से जुड़े 17 लोगों के नामों का भी खुलासा किया।
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सचिवालय में लगभग आधे घंटे की पूछताछ के बाद सौरभ को पुलिस मुख्यालय ले जाया गया। यहां पांच-छह घंटे की लंबी पूछताछ में सौरभ ने बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे और उसके खजांची जय बाजपेई के गठजोड़ को सिलसिलेवार तरीके से बया किया।
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विकास की दबंगई के बल पर जय द्वारा अकूत संपत्तियां अर्जित करने, विकास की काली कमाई को अलग-अलग निवेश करने, जय के गैंग में शामिल लोगों द्वारा संपत्तियां कब्जाने व पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के संरक्षण में विकास व जय के गैंग के फलने-फूलने की बात कही।
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सौरभ ने अपने बयान में कई पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों तथा राजनेताओं का नाम उजागर करते हुए जय व उसके गैंग को संरक्षण देने तथा कारोबार में साझीदार बनने का भी आरोप लगाया। गैंगस्टर के बावजूद आरोपियों के खुलेआम घूमने, धमकियों के बावजूद उसे सुरक्षा न दिए जाने की बात भी कही। सौरभ ने बताया कि एसआईटी ने दोबारा साक्ष्य देने के लिए उसे बुलाया है।