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Vikas Dubey Case: विकास दुबे के मददगार अफसर और नेताओं की बढ़ेंगी मुश्किलें, एसआईटी रिपोर्ट में बचे, लेकिन...
Sun, 06 Dec 2020 01:38 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 06 Dec 2020 01:38 PM IST
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
शिकायत के बाद भी कई पुलिस, प्रशासनिक अफसरों व नेताओं के अलावा विकास दुबे व उसके खजांची जय बाजपेई के गैंग से जुड़े लोग एसआईटी रिपोर्ट में कार्रवाई से बच गए थे। इन सभी के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिवक्ता सौरभ भदौरिया ने बिकरू कांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग को एक और शपथ पत्र सौंपा है।
भाजपा नेता और सपा विधायक
- फोटो : अमर उजाला
सौरभ का कहना है कि आयोग ने उन्हें गवाह बनाकर बयान दर्ज कराने के लिए अगले सप्ताह बुलाया है। सौरभ ने साल 2016 से 2020 तक कानपुर में तैनात रहे एसएसपी, एसपी पश्चिम, सीओ नजीराबाद व सीओ एलआईयू की गहनता से जांच की मांग की। शपथपत्र में कहा कि बिकरू कांड के बाद विकास को भगाने में जिन वाहनों का इस्तेमाल हुआ, वह जय ने अपने खास लोगों के नाम पर खरीदीं थीं।
Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
जांच में इनके नाम सामने आने के बावजूद इन्हें षड्यंत्र का आरोपी नहीं बनाया गया। विकास, जय व उनके गिरोह के सदस्यों के शस्त्र लाइसेंस बनवाने के लिए कई विधायकों, मंत्रियों ने भी सिफारिशी पत्र दिए थे। इन्हें भी शामिल नहीं किया गया। सौरभ ने मांग की कि विकास के गैंग को संरक्षण देकर अंकूत संपत्ति बनाने वाले छह आईपीएस, आठ पीपीएस सहित सभी पुलिसकर्मियों पर विजिलेंस एवं आर्थिक अपराध शाखा एजेंसी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करे।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
शपथपत्र में कहा कि मुकदमों के बाद भी विकास व जय के शस्त्र लाइसेंस व पासपोर्ट बन गए। शिकायत पर आईजी ने तत्कालीन सीओ एलआईयू को जांच सौंपी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। साल 2016 से 2020 तक सीओ एलआईयू रहे अफसर ने जानते हुए भी आंखें बंद रखीं।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
साल 2017 में तत्कालीन एसएसपी ने विकास के गैंग को डी-124 नाम से रजिस्टर्ड कराया था। इस पर भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। आईजी आलोक सिंह ने शिकायत पर जय व उसके गिरोह को संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों की जांच गैर जनपद के पुलिस अफसर को सौंपी थी। एएसपी कन्नौज केसी गोस्वामी ने अपनी रिपोर्ट में कार्रवाई की संस्तुति भी की थी लेकिन रिपोर्ट दबा दी गई।