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बिकरू कांड: मनु के खिलाफ साक्ष्य के बाद भी इतनी मेहरबानी क्यों? चार्जशीट में नाम तक नहीं

Sat, 23 Jan 2021 03:30 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 23 Jan 2021 03:30 PM IST
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Vikas Dubey Case News: Despite the evidence against Manu, not even the name in the charge sheet
मनु पांडेय और विकास दुबे की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड में मंगलवार को दाखिल की गई पूरक चार्जशीट में मनु पांडेय का जिक्र तक नहीं है, जबकि पहली चार्जशीट में पुलिस ने ही उसके खिलाफ साक्ष्य मिलने का दावा कर जांच जारी रहने की बात कही थी। अब उसका नाम हटाने से पुलिस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
Vikas Dubey Case News: Despite the evidence against Manu, not even the name in the charge sheet
विकास दुबे और मनु पांडेय की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कहीं पुलिस मनु को क्लीन चिट देकर गवाह बनाने की तैयारी में तो नहीं है। हालांकि जानकारों का कहना है कि मनु की जो भूमिका है और जो उसके खिलाफ साक्ष्य हैं, उससे उसको गवाह बनाना संभव नहीं है। पुलिस ने माती कोर्ट में उमाशंकर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
Vikas Dubey Case News: Despite the evidence against Manu, not even the name in the charge sheet
विकास दुबे (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
हाल में गिरफ्तार किए गए विपुल दुबे के खिलाफ जांच के बाद चार्जशीट लगाई जाएगी। मगर पूरी चार्जशीट में मनु का नाम नहीं है। उसमें न तो यह लिखा है कि मनु को क्लीन चिट दे दी गई है और न ही यह स्पष्ट किया है कि उसके खिलाफ जांच जारी है।

 
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Vikas Dubey Case News: Despite the evidence against Manu, not even the name in the charge sheet
विकास दुबे (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में सवाल उठता है कि मनु को लेकर पुलिस बैकफुट पर क्यों है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (कॉल रिकॉर्डिंग) होने के साथ-साथ उसके घर के आंगन में सीओ को मारा गया और वह पुलिस को गुमराह करती रही। इसके बावजूद पुलिस ने उसे आरोपी नहीं बनाया।

 
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Vikas Dubey Case News: Despite the evidence against Manu, not even the name in the charge sheet
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
जिनके खिलाफ सिर्फ कहानी, वो जेल में बंद
पुलिस ने बिकरू कांड में नाबालिग खुशी दुबे, रेखा, शांति समेत चार महिलाओं को जेल भेजा है। पुलिस के पास केवल इन सभी के खिलाफ आरोपों की कहानी है। किसी पर ललकारने तो किसी पर वारदात के वक्त कारतूस देने का दावा है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के नाम पर कुछ खास नहीं है, फिर भी सभी को जेल भेज दिया था। जिसके खिलाफ साक्ष्य हैं, वह अभी भी सलाखों के बाहर है।
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