साइबर अपराधियों के गिरोह में शामिल ठग पांचवीं से 11वीं पास हैं लेकिन उनके बातचीत करने का तरीका ऐसा था कि लोग प्रभावित हो जाएं। धमकी देने का स्टाइल किसी अधिकारी से कम नहीं है। कॉल करने के लिए ठगों ने म्यूल नंबर और म्यूल बैंक खाते रखे हुए थे। उन्हीं नंबरों पर ऑनलाइन रुपयों का ट्रांजेक्शन करवाते थे।
कानपुर के एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि रेउना में साइबर अपराधियों का गिरोह काफी समय से इस कार्य से जुड़ा हुआ है। पिछले एक साल से ज्यादा सक्रिय था। एक के बाद एक कई वारदात अंजाम दीं। गिरोह के 10 सदस्यों को कॉल करने की जिम्मेदारी दी जाती थी। सभी अलग-अलग कोनों में बैठकर कॉल करते थे जबकि अन्य लोगों की जिम्मेदारी क्षेत्र की निगरानी की रहती थी।
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रेउना थाना क्षेत्र के राठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मणपुर बड़ेला गांव से गिरफ्तार किए गए 20 साइबर ठग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ लोग गांव के थोड़ी दूरी पर मौजूद रहते थे। अगर कोई पुलिसवाला या सरकारी गाड़ी दिखाई देती थी तो तुरंत सूचना देते । पुलिस को मुखबिरों ने इसकी जानकारी दी जिसके लिए पहले से एहतियात रखा गया। फोर्स काफी दूरी पर रहा और ड्रोन से निगरानी की गई। साइबर अपराधी जैसे ही अपने कार्य में व्यस्त हुए टीम ने दबिश दे दी।
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रुपयों की निकासी के सभी एप की जानकारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों को बैंक एप समेत रुपयों की निकासी के सभी तरीकों की जानकारी थी। ठग कॉल उठाने और बोलने वाले का तरीका देखकर उसे ठगी की साजिश में फंसाते थे। अगर कोई उम्र दराज बुजुर्ग या हल्की आवाज वाला युवक कॉल उठाता तो उसको पेंशन स्कीम, बिजली बिल में छूट, कृषि बीमा के लाभ की बात बताई जाती थी।
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रेउना थाना क्षेत्र के राठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मणपुर बड़ेला गांव से गिरफ्तार किए गए 20 साइबर ठग
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उससे कहा जाता था कि आपके आधार नंबर को स्कीम में पंजीकृत कर दिया गया है। इसके लिए रकम लगेगी। शुरुआत में छोटी रकम ठगी जाती जिससे शक न हो सके। आवास के लिए 11 हजार रुपये तक मांगा करते थे। अश्लील वीडियो देखने के मामले में आरोपियों ने 11 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक बैंक खातों में मंगवाए गए।
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कोई सवाल-जवाब करता तो सायरन बजाते
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी क्राइम ब्रांच या अन्य पुलिस अधिकारी बनकर बातचीत करते थे। अगर कोई सवाल-जवाब या अर्दब में लेने की कोशिश करता था तो दूसरे सदस्य पुलिस सायरन बजाकर गिरफ्तार करने की धमकी देते थे। कई बार दूसरा सदस्य वरिष्ठ अधिकारी बनकर बात करता था। उनका कहना था कि पुलिस तुम्हें पकड़ने के लिए निकल चुकी है। अगर बचना चाहते हो तो जमानत की राशि दे दो वरना गिरफ्तार कर दिल्ली ले जाया जाएगा।