कानपुर में 2020 में हुए संजीत अपहरण-हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई की चार सदस्यीय टीम मंगलवार सुबह एक बार फिर बर्रा थाने पहुंची। थाना प्रभारी मानवेंद्र सिंह से हत्यारोपियों के बारे में कई जानकारियां जुटाई। इसके साथ ही फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस के बयानों का मिलान किया।
संजीत अपहरण हत्याकांड: सीबीआई ने कानपुर में जमाया डेरा, छानबीन तेज की
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22 जून 2020 की रात बर्रा-5 निवासी लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का अपहरण हो गया था। चार दिन बाद अपहृर्ता ने पिता चमनलाल को फोन कॉल करके 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। संजीत को छुड़ाने के लिए घरवालों ने 30 लाख रुपये पुलिस को दिए थे। 29 जून को तत्कालीन एसपी साउथ अर्पणा गुप्ता, सीओ गोविंदनगर मनोज कुमार गुप्ता व बर्रा पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया था, लेकिन बदमाश गुजैनी पुल के पास पुलिस को गच्चा देकर फरार हो गए थे। साथ ही रुपयों से भरा बैग भी ले गए थे।
पुलिस ने 23 जुलाई को अंबेडकरनगर निवासी गिरोह के सरगना रामजी शुक्ल, दबौली वेस्ट निवासी ईशू उर्फ ज्ञानेंद्र, सरायमीता कच्ची बस्ती पनकी निवासी संजीत के दोस्त कुलदीप गोस्वामी, गज्जापुरवा निवासी नीलू सिंह, गुमटी नंबर पांच निवासी प्रीति शर्मा, सिम्मी सिंह उर्फ जयकरन फत्तेपुर रोशनाई अकबरपुर कानपुर देहात निवासी राजेश उर्फ चीता उर्फ टाइगर को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि संजीत का अपहरण करके रतनलालनगर के एक मकान में रखे जाने और फिर हत्या करके शव पांडु नदी में फेंका गया था। संजीत का शव आज तक नहीं मिला है। कुछ माह बाद ही सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी।
इस सवालों के जवाब तलाशेगी सीबीआई
- संजीत की अपहरण के बाद हत्या की गई तो शव कहां गया।
- अगर पुलिस ने खुद 30 लाख रुपये की फिरौती दी थी तो रुपये क्यों नहीं बरामद हुए।
- पुलिस संजीत के कपड़े, बैग, मोबाइल समेत अन्य समान क्यों नहीं बरामद कर सकी।