{"_id":"5c2e12adbdec2257036f829a","slug":"reason-of-snoring-in-winter-season","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"सर्दियों में बढ़ जाते हैं खर्राटे, आज जान लीजिए इसकी वजह, जान जोखिम में डालेंगी ये 5 लापरवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सर्दियों में बढ़ जाते हैं खर्राटे, आज जान लीजिए इसकी वजह, जान जोखिम में डालेंगी ये 5 लापरवाही
Thu, 03 Jan 2019 08:43 PM IST
gaurav gaurav
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: gaurav gaurav
Updated Thu, 03 Jan 2019 08:43 PM IST
विज्ञापन
डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्दियों में प्रदूषण के कारण लोगों को खर्राटे की समस्या अधिक हो जाती है। प्रदूषण के तत्व नाक, गले के रास्ते और फेफड़ों तक रुकावट पैदा करते हैं। नली में सूजन आ जाती है। शरीर में आक्सीजन घटती है और खर्राटे आते हैं जिससे शरीर में आक्सीजन लेवल घट जाता है।
डेमो
सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने बताया कि खर्राटे 40 डेसीबिल से 120 डेसीबल तक ध्वनि पैदा करते हैं। दुनिया का सबसे तेज खर्राटे का साउंड 120 डेसीबिल है। खर्राटों से व्यक्ति को हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक का खतरा तो रहता ही है। इसके साथ ही इससे तलाक के मामले भी बढ़ रहे हैं।
डेमो
सुबह उठने पर महिला को दर्द तो समस्या खर्राटे की
महिलाओं में खर्राटे की बीमारी पुरुषों से अलग लक्षण देती है। महिलाओं को सुबह उठने पर अगर सिरदर्द रहे तो समझना चाहिए कि उसे खर्राटे की बीमारी है। विशेषज्ञों ने महिलाओं में अलग लक्षण की वजह जेनेटिक्स और हारमोंस बताई है। अक्सर महिलाएं सिर दर्द होने पर माइग्रेन का इलाज कराने लगती है। बच्चों में यह दिक्कत नाक में एडीनॉयड ग्रंथि या पॉलिप बढ़ने से हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के संक्रमण काल में खर्राटे अधिक हो जाते हैं। मानसिक तनाव के अलावा ठंडक बढ़ने पर यह दिक्कत बढ़ती है और गर्मी में कम हो जाती है।
महिलाओं में खर्राटे की बीमारी पुरुषों से अलग लक्षण देती है। महिलाओं को सुबह उठने पर अगर सिरदर्द रहे तो समझना चाहिए कि उसे खर्राटे की बीमारी है। विशेषज्ञों ने महिलाओं में अलग लक्षण की वजह जेनेटिक्स और हारमोंस बताई है। अक्सर महिलाएं सिर दर्द होने पर माइग्रेन का इलाज कराने लगती है। बच्चों में यह दिक्कत नाक में एडीनॉयड ग्रंथि या पॉलिप बढ़ने से हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के संक्रमण काल में खर्राटे अधिक हो जाते हैं। मानसिक तनाव के अलावा ठंडक बढ़ने पर यह दिक्कत बढ़ती है और गर्मी में कम हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डेमो
योग, व्यायाम और प्रोटीन डाइट घटाती खर्राटे
विशेषज्ञों का कहना है कि योग, व्यायाम और प्रोटीन डाइट लेने से खर्राटे की दिक्कत को कम किया जा सकता है। एप्निया हेल्थ इंडेक्स 10 होने पर व्यायाम, योगिक क्रियाएं शुरू कर देनी चाहिए। इंडेक्स 40 के ऊपर होने पर सीपेप मशीन की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिनका कॉलर साइज 17 इंच से अधिक हो यानी गला मोटा और छोटा हो उन्हें सांस की समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि योग, व्यायाम और प्रोटीन डाइट लेने से खर्राटे की दिक्कत को कम किया जा सकता है। एप्निया हेल्थ इंडेक्स 10 होने पर व्यायाम, योगिक क्रियाएं शुरू कर देनी चाहिए। इंडेक्स 40 के ऊपर होने पर सीपेप मशीन की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिनका कॉलर साइज 17 इंच से अधिक हो यानी गला मोटा और छोटा हो उन्हें सांस की समस्याएं हो सकती हैं।
विज्ञापन
डेमो
खर्राटे ऐसे करते दिल को नुकसान
मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि खर्राटों का प्रभाव ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इससे हार्ट पर लोड बढ़ जाता है। बहुत दिनों तक खर्राटों से हार्ट फेल होने लगता है। धमनियों में वसा जमने लगता है। धमनियों की दीवारों पर खून के थक्के जमने लगते हैं। थक्का दिल में जाने से हार्ट अटैक और दिमाग की नस में जमने से ब्रेन अटैक होता है। वहीं डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया कि लोग झोला छाप जांच करने वालों से बचें। टेक्नीशियन दुकानें खोलकर जांच कर रहे हैं।
मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि खर्राटों का प्रभाव ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इससे हार्ट पर लोड बढ़ जाता है। बहुत दिनों तक खर्राटों से हार्ट फेल होने लगता है। धमनियों में वसा जमने लगता है। धमनियों की दीवारों पर खून के थक्के जमने लगते हैं। थक्का दिल में जाने से हार्ट अटैक और दिमाग की नस में जमने से ब्रेन अटैक होता है। वहीं डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया कि लोग झोला छाप जांच करने वालों से बचें। टेक्नीशियन दुकानें खोलकर जांच कर रहे हैं।