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'का भइया समोसा अकेले अकेले...', कुछ इस अंदाज में राजू ने बताए जिंदगी के अनुभव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 03 Sep 2018 06:41 PM IST
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राजू श्रीवास्तव
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दोस्तों जिंदगी में ऐसे ऐसे अनुभव होते हैं जो आप न चाहकर भी भूल नहीं सकते.. अइसेहेन एक दफा केर बात है हम और संकठा कानपुर से रायबरेली जाय रहे रहेन तो जउन हमरी टैक्सी के ड्राईवर रहें वो तनिक चिलबिल्ल्ला टाइप के आदमी रहें..। ऊ सामने रोड पर कम और अंदर सीसे से पीछे हमरी तरफ जादा देखत रहें..। संकठा उनसे एक दो दफा कहिन भी कि भैया आगे देखो मगर ऊ कहा माने वाला..। ऊ ड्राईवर हमसे कहे लगे कि पहिचान लिया.. आप तो गजोधर भैया हो टीवी पर आते हो..। हम कहा हां.. तो कहिस आप भैया हंसात बहोत हो..। हम कहा हां हां.. पर आप सामने देखत भये चलाओ..। तो कहे लगा अरे हमरी गाड़ी को सब मालूम है.. इस रूट पर गाड़ी चलात 22 साल हुई गए हमका..। कभी कभी तो हम गाड़ी के एक्सीलेटर पर गुम्मा रख के पीछे सो जात हैं..।
राजू श्रीवास्तव
अउर ओकी गाडी अइसन रही कि हॉर्न छोड़ के सब बजत रहा..। तबहीं संकठा कहे लगे कि भूख लगी है.. तो हम एक ढाबे पे गाड़ी रुकवावा..। हम पूछा संकठा से कि का खहियो.. तो कहे लगे रुमाली रोटी खइबे.. बढ़िया रहत है आधी खाओ आधी से मुंह पोंछ लेव.. हम कहा मुराही ना करौ.. ई बताओ का खहियो.. तो ऊ समोसा मंगवाय लिहिन.. ड्राईवर से पूछे तो ऊ कहे लगे की हम आपन टिफिन घर से लई के चलित है.. हम ढाबे मालिक से पूछा आपके हिंया का खास बनत है तो कहे कद्दू किशमिश.. हम कहा यार ई नाम पहिली बार सुने हन..। हम कद्दू किशमिश और रोटी का आर्डर दई दिया.. इधर संकठा समोसा फोड़ेन रहें कि उनका कोऊ मिले वाला देख लिहिस..।
राजू श्रीवास्तव
ऊ कहिस का भैया समोसा अकेले अकेले? संकठा कहिन नहीं भइया हरी चटनी के साथ खाय रहे हैं.. तबहीं हम ध्यान दिहा कि संकठा समोसे के अंदर केर सिर्फ आलू आलू खाय रहा है.. तो हम पूछा ई का लभेड़ है.. तो कहे लगा हमका बाहर केर खाना मना है..। तबहीं ढाबा मालिक ड्राईवर को अपना टिफिन खात देख भड़क गवा..। कहिस हमरे ढाबे पे बईठ के पंखे केर हवा खात भये फ्रिज केर ठंडा पानी पियत भये बाहर केर खाना खात हौ.. तो संकठा कहे लगे नहीं भैया हम समोसा खोल के अंदर का खाय रहे हैं..। खैर हम ढाबे मालिक का समझावा की एक्स्ट्रा पैसा लई लिहो.. तो ऊ चला गवा.. फिर आवा हमरा स्पेशल आर्डर कद्दू किशमिश.. हम खाना शुरू किया.. पर ई का?.. हम ढाबा मालिक का बुलावा.. ए भैया.. ई तोहार कद्दू किशमिश मा तो एक्कौ किशमिश नहीं है.. तो ऊ कहे लगा अरे किशमिश है ओमा..।
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राजू श्रीवास्तव
बात ई है भैया कि हम जरा इन्साफ पसंद आदमी हूं.. सबका बराबरी से.. एक नजर से देखता हूं.. एका बनाय मा हम एक कद्दू लिया और एक किशमिश.. एमा किशमिश है.. ढूंढो मिल जाय तो तोहार नसीब..। खैर खाना खाय के हम लोग आगे चल पड़े..। तबहीं ऊ ड्राईवर हमसे कहिस.. भैया एक ठो निवेदन है आपसे...। कहे लगा बछरावां में हमार ससुराल है और हमार मेहरारू भी वहीं है.. आप एक मिनट चले चलो.. सब बहुत खुश हुइयै..।
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राजू श्रीवास्तव
बड़ा गिड़गिड़ावा तो हम कहा ठीक है चलो जादा देर नहीं लगाना..। खैर ससुराल मा उनकी मेहेरिया मिली.. कहे लगीं अरे राजू भईया.. इतना आपको टीवी पे देखत हैं.. आपका पेट सफा और ना जाने का का नौटंकी.. टीवी पे तो कई बार देखे हैं आपको मगर जिन्दा पहिली बार देख रहे हैं..। हम कहा हां हां लाइव.. फिर ऊ हमसे जिद करे लगीं कि कुछ खा लीजिये.. हम कहे ठीक है का है खवाए खातिर.. तो बोली ब्रेड धरी है.. तो ब्रेड के उप्पर शहेद लगा के दई दें? हम कहे खबरदार.. खबरदार शहेद ना दिहो लगाए के.. ये हनी.. ये जूठा होत है.. इ मधुमक्खी के मुंह से निकला होत है..। अउर हम केहू के मुंह से निकली चीज नहीं खात हैं.. तो वो बोली अच्छा.. अंडा बना दें?
लास्ट मा एक्कै बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ..
काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है ..--- राजू श्रीवास्तव
लास्ट मा एक्कै बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ..
काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है ..--- राजू श्रीवास्तव