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नरेश ने बढ़ाई सपा की चुनौती, असमंजस में भाजपाई
टीम डिजिटल,अमर उजाला,कानपुर
Updated Tue, 13 Mar 2018 11:19 AM IST
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नरेश अग्रवाल
कद्दावर नेता नरेश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होने के बाद जिले के सियासी समीकरण अचानक बदल गए हैं। निश्चित रूप से भाजपा को नरेश के आने से मजबूती मिलेगी, पर सपा की चुनौती भी बढ़ गई है।
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नरेश अग्रवाल
यह बात और है कि सपा के जिम्मेदार नरेश के जाने पर मिठाई बांटकर खीझ मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। इस सबसे इतर नरेश के व्यक्तिगत विरोधियों के लिए भी एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। नरेश का विरोध कर खुद को राजनीति में जिंदा रखने के लिए भगवाधारी हुए राजनीतिक कार्यकर्ता और नेता असमंजस में हैं।
नरेश अग्रवाल
नरेश अग्रवाल को राजनीति का चतुर खिलाड़ी माना जाता है। परिस्थितियों का आकलन कर निर्णय लेने की उनकी क्षमता का विरोधी भी लोहा मानते हैं। शायद यही कारण रहा कि जनपद में विधानसभा चुनावों में कभी भी नरेश अग्रवाल की हार नहीं हुई और तो और उनके पुत्र नितिन अग्रवाल भी पिछले तीन चुनावों से लगातार विधानसभा पहुंच रहे हैं। अब जब नरेश अग्रवाल भाजपा में शामिल हो गए हैं तो पूरा जिला भाजपामय हो गया है।
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नरेश अग्रवाल
यूं तो समाजवादी पार्टी जनपद स्तर पर वृहद संगठन होने का दावा करती है, पर हकीकत यह है कि सपा के जनपद के 90 फीसद कार्यकर्ता नरेश अग्रवाल के साथ हैं। सही मायने में कहे तो जनपद में किसी पार्टी के कार्यकर्ता कम है बल्कि नरेशी ज्यादा है, जो नरेश अग्रवाल के हिसाब से ही पार्टी भी बदल लेते हैं। बदले दौर में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना सपा को करना पड़ेगा।
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नरेश अग्रवाल
जनपद के रहने वाले डॉक्टर राजपाल कश्यप विधान परिषद सदस्य है और अखिलेश यादव के अति करीबी लोगों में गिने जाते हैं। बदली परिस्थितियों में जनपद में डॉक्टर राजपाल कश्यप को ही सपा का चेहरा बनना पड़ेगा। इससे पूर्व तक सपा में जो भी पुराने लोग थे उनमें से अधिकतर पिछले एक वर्ष के दौरान भाजपाई हो चुके हैं। समस्या उन लोगों के सामने भी आएगी जो सिर्फ नरेश अग्रवाल के विरोध की बदौलत अपना नाम चमकाते हैं।