यूपी के कानपुर जिले के महाराजपुर थाना इलाके के नजफगढ़ में महिला चांदनी (35) ने मंगलवार सुबह दो बेटियों पायल (8) और ब्यूटी (5) को जहर खिलाने के बाद खुद भी खा लिया। इससे तीनों की मौत हो गई। वह पति राकेश से अलग होने के बाद पांच साल से मायके में रह रही थीं। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
नजफगढ़ निवासी चांदनी का विवाह 2012 में मैनपुरी करहल क्षेत्र के राकेश उर्फ नेता के साथ हुआ था। परिजन का कहना है कि पति के शराब पीने की लत के कारण उनमें विवाद होता था। करीब पांच साल पहले दोनों में अलगाव हो गया।
इसके बाद चांदनी बेटियों के साथ मायके में रह रही थी। चांदनी के पिता रामलाल पासवान गुजरात में प्राइवेट नौकरी करते हैं। मंगलवार सुबह लगभग साढ़े आठ बजे चांदनी की मां शांति देवी भूसा लेने खेत गई थीं। घर में दोनों बेटियों के साथ चांदनी थी।
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मां और दो बेटियों की मौत के बाद विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करीब नौ बजे चांदनी बाहर बैठकर उल्टियां कर रही थीं जबकि पायल और ब्यूटी उसकी गोद में बेसुध हालत में थीं। तीनों की हालत देखकर रिश्ते के भाई ने कारण पूछा तो चांदनी ने जहर खाने की बात बताई। उसने शोर मचाकर ग्रामीणों को एकत्रित किया। एंबुलेंस सेवा 108 पर सूचना दी लेकिन दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। तीनों को निजी कार से सरसौल सीएचसी ले गए। यहां तीनों की गंभीर हालत देख डॉक्टरों ने हैलट अस्पताल भिजवाया। हैलट में डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
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कानपुर सुसाइड केस
- फोटो : amar ujala
परिजन शव गांव ले आए थे। अस्पताल की सूचना पर महाराजपुर पुलिस मौके पर पहुंची। घरवाले पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं हुए। समझाने के बाद शवों को पोस्टमार्टम भेजा गया। पुलिस ने घर की जांच की। मौके से किसी तरह का कोई जहरीला पदार्थ नहीं मिला। चूल्हे के पास कटी हुई लौकी थी। एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह, महाराजपुर इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने पूछताछ की।
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कानपुर सुसाइड केस
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एंबुलेंस नहीं आई, मौत ने तीन को दबोचा
इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या फिर बदइंतजामी। ग्रामीण क्षेत्र में 10 मिनट में पहुंचने का दंभ भरने वाली सरकारी एंबुलेंस का दावा महाराजपुर में एक बार फिर झूठा साबित हुआ। नजफगढ़ गांव में जहरीला पदार्थ खाने से अचेत हुईं चांदनी और उसकी बेटी पायल और ब्यूटी को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों के बार-बार फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। उन्हें निजी वाहन से स्वास्थ्य केंद्र से हैलट तक पहुंचाने में करीब ढाई घंटे का समय बर्बाद हो गया। तब तक तीनों की सांसे थम गईं।
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कानपुर सुसाइड केस
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चांदनी के भाइयों का आरोप था कि अगर समय से अस्पताल पहुंच जाते तो शायद तीनों जिंदा होते। इससे पहले भी 23 अप्रैल को छतमरा चौराहे पर गश खाकर गिरे मजदूर को 45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली थी। इससे उसकी जान चली गई थी। नजफगढ़ निवासी चांदनी और उसकी बेटियों पायल और ब्यूटी की मौत हो गई। पड़ोस में रहने वाले भाई धर्मेंद्र, जितेंद्र और प्रताप का कहना था कि उन लोगों को करीब 7.30 बजे जानकारी हुई तो एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 डायल किया।