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जाजमऊ हादसे में बड़ा खुलासा, महताब ने पैसा बचाने के लिए अनाड़ी हाथों में थमा दी कन्नी-बसूली

Sun, 05 Feb 2017 11:24 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 05 Feb 2017 11:24 AM IST
सार

अनाड़ी हाथों में थमा दी कन्नी-बसूली
राजगीर को 350 जबकि मजदूर को किया जाता था 250 रुपये का भुगतान
नोटबंदी के कारण काम न मिलने से बेबस मजदूर मानते गए सब शर्तें

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mehtab alam role in jajmau building collapse
जाजमऊ में ढही बहुमंजिला इमारत - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
जाजमऊ में सपा नेता महताब आलम की अवैध इमारत ढहने के मामले में नया खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को सपा नेता ने पैसा बचाने का मकसद बना लिया था। ऐसे मजदूरों को कन्नी और बसूली थमा दी गई, जिन्होंने पहले कभी यह काम नहीं किया था। इसी के चलते इमारत में न तो मानक के अनुरूप मैटेरियल लग रहा था और न ही काम हो रहा था।


 

मानक के अनुरूप नहीं हो रहा था कोई भी काम

mehtab alam role in jajmau building collapse
जाजमऊ में धराशायी हुई निर्माणाधीन बिल्डिंग की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
इमारत ढहने की एक महत्वपूर्ण वजह यह भी मानी जा रही है। जाजमऊ के गज्जूपुरवा में मंगलवार को सपा नेता महताब आलम की निर्माणाधीन इमारत ढह गई। इसमें बेगुनाह 10 मजदूरों की जान चली गई जबकि 21 से ज्यादा लोग घायल हो गए। कई वाहन और आसपास की इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। घटना के बाद एनडीआरएफ, सेना, स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने रेसक्यू आपरेशन चलाया। रेसक्यू आपरेशन में लगे एनडीआरएफ के एक अफसर ने बताया कि इमारत में काम करने वाले कई मजदूरों से बातचीत में पता चला है कि यहां मजदूरी करने वाले कई लोग नोटबंदी के बाद से राजमिस्त्री बन गए थे। मजदूर से राजमिस्त्री पद पर प्रमोट हुए लोग ही स्लैब और पिलर के लिए मैटेरियल तैयार कराते थे।

 

रुपये बचाने के लिए सपा नेता और ठेकेदार ने किया खेल

mehtab alam role in jajmau building collapse
जाजमऊ में धराशायी हुई निर्माणाधीन बिल्डिंग के तले दबी कार - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
इसके बाद स्लैब और पिलर भी यही राजमिस्त्री बनाते थे। ऐसा रुपये बचाने के लिए सपा नेता और ठेकेदार ने किया था। अफसर ने बताया कि आमतौर पर राजमिस्त्री 550 रुपये प्रतिदिन मेहनताना लेता है। यहां पर मात्र 350 रुपये में कई राजमिस्त्री काम कर रहे थे। वहीं मजदूर को 250 रुपये दिहाड़ी मिलती थी, जबकि बाजार में मजदूर की दिहाड़ी 350 रुपये है। ठेकेदार मजदूर से एक हफ्ता काम कराने के बाद पांच दिन की मजदूरी देता था। श्याम नगर निवासी मजदूर भूपेंद्र ने बताया कि ठेकेदार के कम मजदूरी देने और हफ्ते में दो दिन की मजदूरी का भुगतान न देने की शिकायत सपा नेता से कई बार की गई, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए अनसुना कर दिया कि जो समस्या है ठेकेदार से कहो और सुनो।
 
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नोटबंदी के दौरान काम न मिलने से बेबस मजदूर पेट के लिए चुपचाप मानते गए सारी शर्तें

mehtab alam role in jajmau building collapse
जजामऊ निर्माणाधीन बिल्डिंग ढहने के बाद निकाली गई बुरी तरह कुचली हुई लाशें - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
​नोटबंदी के दौरान काम न मिलने से बेबस मजदूर पेट के लिए चुपचाप सारी शर्तें मानते गए। -- सुरक्षा कर्मियों के जरिए पास करता था ट्रक सपा नेता महताब आलम की सत्ताधारी दल के एक कद्दवर नेता समेत कई और नेताओं से सीधी पैठ है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश सरकार की तरफ से मुहैया कराए गए सुरक्षाकर्मियों (गनर) का इस्तेमाल वह कारोबार में करता था। महताब की ट्रांसपोर्ट कंपनी है, जिसमें 100 से ज्यादा ट्रक हैं। शहर और आसपास के जिलों में ओवरलोड ट्रक पुलिस या वाणिज्य कर की टीम पकड़ लेती थी। तब सपा नेता गनरों के साथ वहां पहुंच जाता था। सिपाही और दरोगा स्तर के कर्मचारी सपा नेता का भौकाल देखकर पीछे हट जाते थे और ट्रक पास कर देते थे। कई बार आरटीओ और वाणिज्य कर अफसर भी बिना कार्रवाई के ट्रक छोड़ चुके हैं।
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