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फेफड़ाें को प्रदूषण से है बचाना ताे करना हाेगा ये काम
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 05 Dec 2017 12:07 PM IST
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शहर का प्रदूषण दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। अगर अाप राेड पर बिना मास्क अाैर हेलमेट लगाये निकलते हैं ताे अाप काे सांस अाैर अांखाें में जलन हाेना स्वाभाविक है। एेसे में अगर अाप इससे बचना चाहते हैं अाैर अपने फेफड़ों काे मजबूत बनाना चाहते हैं ताे अापकाे याेग का सहारा लेना हाेगा।
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फेफड़ों पर पड़ रहे असर को कम करने के लिए योग
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प्रदूषण की वजह से फेफड़ों पर पड़ रहे असर को कम करने के लिए योग, प्राणायाम का भी सहारा लिया जा सकता है। आर्ट ऑफ लिविंग के योग शिक्षक पंकज मिश्र का कहना है कि जिस तरह से आजकल वातावरण में प्रदूषण फैल रहा है।
प्राणायाम करना फायदेमंद रहेगा
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ऐसी स्थिति में प्राणायाम खुली जगह पर करना ठीक नहीं होगा। इसके लिए कोई बंद और साफ सुथरी जगह पर प्राणायाम करना फायदेमंद रहेगा। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर लोग सांस लेने के लिए फेफड़े के 30 प्रतिशत हिस्से को ही प्रयोग में लाते हैं।
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प्राणायाम से फेफड़े का प्रयोग शत प्रतिशत किया जा सकता है। प्राणायाम सांस छोड़ने और लेने की एक प्रक्रिया है जिसे एक निश्चित अवधि में किया जाता है। इससे फेफड़े फैलते हैं। इससे श्वसन क्रिया अच्छी होती है साथ ही रक्त संचार भी सही रहता है।
सोमवार को हवा का एक्यूआई (एयर क्लाविटी इंडेक्स)
शाम सात बजे...239
रात 9 बजे........280
रात 10 बजे.......300
एक्यूआई की सामान्य स्थिति...0 से 50
सोमवार को हवा का एक्यूआई (एयर क्लाविटी इंडेक्स)
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