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मिलिए अर्चना कुमारी से जाे बीकॉम करने के बाद बन गईं लोको पायलट

Thu, 08 Mar 2018 02:11 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 08 Mar 2018 02:11 PM IST
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loco pilot archana on international womens day
अर्चना कुमारी की कहानी
जब लड़कियां डॉक्टर इंजीनियर बनने का सपना देख रहीं थीं तब मूल रूप से पटना की रहने वालीं अर्चना कुमारी ने रेलवे में लोको पायलट बनने का करियर चुना। उन्होंने इसके लिए दिल लगा कर पढ़ाई की और आखिर में उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया। 


 
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अर्चना ने बीकॉम करने के बाद पास की पॉलीटेक्निक
अर्चना ने गवर्नमेंट वूमन पॉलीटेक्निक पटना से इंजीनियरिंग का डिप्लोमा हासिल किया। अर्चना के पति धीरेंद्र कुमार पटना में मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव हैं। अर्चना कुमारी अभी गोविंद नगर में रह रही हैं।

 
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अर्चना ने गवर्नमेंट वूमन पॉलीटेक्निक पटना से पढ़ाई की है
साल 2017 में लोको पायलट के तौर पर नौकरी ज्वाइन की। वह कानपुर, इलाहाबाद, टुंडला, मुगलसराय रोड के इंजन की ड्राइवर हैं। अर्चना के दो बच्चे गीतिका और अनिरुद्ध अभी प्ले ग्रुप में पढ़ते हैं। इनकी मां बच्चों की देखरेख करती हैं।

 
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लाेकाे पायलट अर्चना कुमारी
रेलवे के एई आरपी सिंह की तारीफ करते हुए अर्चना कहती है सर का सपोर्ट है तभी रात की ड्यूटी की बजाय केवल दिन की ही ड्यूटी लगती है। सभी महिला लोको पायलट दिन में ही ड्यूटी करती हैं। कानपुर हेड क्वार्टर में 10 लड़कियां लोको पायलट हैं। 
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