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विकास दुबे को लेकर नया खुलासा, नहीं किया किसी की जमीन पर कब्जा, सिर्फ इतनी भूमि का था काश्तकार
Sat, 18 Jul 2020 09:16 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 18 Jul 2020 09:16 AM IST
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Vikas Dubey encounter
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस एनकाउंटर में मारा गया विकास दुबे सिर्फ डेढ़ बीघा जमीन का काश्तकार था। बिकरू गांव में जहां उसका घर है, उसके नाम से सिर्फ इतनी ही जमीनी निकली है। जिला प्रशासन की तरफ से विकास दुबे के नाम की जमीनों को लेकर की गई नापजोख में यह रिपोर्ट सामने आई है। विकास दुबे के पिता के नाम पर करीब आठ बीघे जमीन निकली है। जनपद की सभी तहसीलों में उप जिलाधिकारियों के निर्देशन में विकास दुबे के नाम जमीनों की जांच की गई।
विकास दुबे मुठभेड़ में मारा गया
- फोटो : सोशल मीडिया
जांच में पाया गया है कि किसी भी तहसील में विकास दुबे के नाम से जमीन कब्जा करने की कोई शिकायत दर्ज नहीं है। इसी के आधार पर प्रशासन ने अभी तक यह माना है कि विकास दुबे ने जिले में किसी की जमीन को कब्जा नहीं किया है। लेकिन शासन की तरफ से विकास दुबे की संपत्तियों को लेकर जिस तरह से निर्देश जारी किया गया है उसमें बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन फिर से उसकी संपत्तियों की जांच करा रहा है।
vikas dubey news
- फोटो : amar ujala
उद्योग लगाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाता था
जिला प्रशासन की तरफ से विकास दुबे की संपत्तियों की जांच के लिए लगाई गई टीम की जांच में यह बात भी सामने आई है कि विकास दुबे क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाता था। इसके एवज में उद्यमियों की तरफ से उसे अच्छी खासी रकम दी जाती थी।
जिला प्रशासन की तरफ से विकास दुबे की संपत्तियों की जांच के लिए लगाई गई टीम की जांच में यह बात भी सामने आई है कि विकास दुबे क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाता था। इसके एवज में उद्यमियों की तरफ से उसे अच्छी खासी रकम दी जाती थी।
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vikas dubey
- फोटो : amar ujala
हालांकि दहशतगर्द विकास दुबे और पुलिस-प्रशासन के बीच की साठगांठ का बड़ा सबूत सामने आया है। विकास दुबे ने असलहा बाबू से मिलकर अपने 15 से 18 गुर्गों के फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाए थे। ये लाइसेंस पिछले साल जनवरी से मार्च के बीच जारी किए गए। तब 77 फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में असलहा बाबू समेत सात आरोपी जेल भी गए थे। हालांकि विकास के गुर्गों के लाइसेंस मामलों का खुलासा नहीं हुआ था। अब एसटीएफ की तफ्तीश में इसका खुलासा हुआ है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : ANI
बिकरू कांड के बाद छानबीन में पता चला था कि बदमाशों ने लाइसेंसी असलहों से भी पुलिस पर गोलियां बरसाईं थीं। इसलिए एसटीएफ ने विकास के गुर्गों के शस्त्र लाइसेंसों की तफ्तीश की। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक जांच में पता चला कि फर्जी दस्तावेज लगाकर 15 से 18 लाइसेंस बनवाए गए थे। यह पूरा खेल विकास ने असलहा बाबू विनीत तिवारी के साथ मिलकर किया। असलहा बाबू विकास के इशारों पर काम करता था। विकास ने एक वकील के मुंशी जय किशन उर्फ जैकी के जरिये लाइसेंस के दस्तावेज भिजवाए थे। बाबू ने पूरा खेल कर लाइसेंस जारी करवाए।