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कानपुर एनकाउंटर: शहीद हुए आठ पुलिसकर्मी, परिजन बोले विकास के सीने पर पड़े गोली तब मिलेगी कलेजे को ठंडक
Fri, 03 Jul 2020 08:45 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 03 Jul 2020 08:45 PM IST
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कानपुर एनकाउंटर में शहीद पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस के साथ हुई दिल दहलाने वाली घटना ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए हैं। मृतकों में क्षेत्राधिकारी बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा, थाना प्रभारी शिवराजपुर महेश चंद्र यादव, चौकी इंचार्ज मंधना अनूप कुमार सिंह, सब इंस्पेक्टर नेबू लाल, सिपाही सुल्तान सिंह, सिपाही राहुल दिवाकर, सिपाही बबलू कुमार, सिपाही जितेंद्र शामिल हैं। शहीद पुलिसकर्मियों के परिजन बोले जब विकास के सीने में गाेली पड़ेगी तब कलेजे को ठंडक मिलेगी।
शहीद देवेंद्र कुमार मिश्र (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
चार माह पूर्व चंद घंटे के लिए आए थे पैतृक घर
बांदा के लाल पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) देवेंद्र कुमार मिश्र के कानपुर में बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद होने की खबर से उनके पैतृक गांव सहेवा में शोक की लहर छा गई। देवेंद्र चार महीने पहले चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में ड्यूटी करने के बाद कानपुर जाते वक्त कुछ घंटों के लिए गांव आए थे और परिजनों व गांव वालों से जल्द ही दोबारा आने का वादा भी कर गए थे, लेकिन दोबारा आने की जगह गांववालों को रुला कर हमेशा-हमेशा के लिए चले गए।
सहेवा गांव के महेश प्रसाद मिश्र के तीन बेटों में सबसे बड़े देवेंद्र मिश्र पुलिस में काफी पहले भर्ती हो गए थे। अब उनके रिटायरमेंट का समय था। अगले साल ही सेवानिवृत्त होना था। हालांकि उनका परिवार बांदा और कानपुर में ज्यादा रहता है। पैतृक गांव में उनके रिश्ते के चाचा चंद्रशेखर मिश्र हैं। खपरैलदार मकान के बाहर देवेंद्र मिश्र पुलिस उपाधीक्षक की नेम प्लेट लगी है। शहादत की खबर आते ही सुबह ही खुरहंड चौकी और स्थानीय पुलिस की टुकड़ी उनके घर पहुंच गई और सांत्वना जताई। इसी बीच गांव के बुजुर्गों का जमघट लग गया।
डीजी ने किया था पुरस्कृत
क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र अपने कर्तव्यों के प्रति जागरुक और ईमानदार थे। वे बहादुर भी दे। शायद बहादुरी का यही जज्बा उनकी जान जाने का सबब बन गया। उनकी बहादुरी की बानगी थी कि वर्ष 2012 में चर्चित ट्रेन डकैती के बदमाशों को उन्होंने दबोच कर लूट का माल भी बरामद किया था। तब वे इंस्पेक्टर थे। तत्कालीन पुलिस महानिदेशक अतुल ने उन्हें 15 हजार रुपये इनाम और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। बाद में पुलिस उपाधीक्षक पद पर पदोन्नत हुए। गिरवां थाना इंस्पेक्टर शशि कुमार पांडेय ने बताया कि अगले वर्ष देवेंद्र मिश्र सेवानिवृत्त होने वाले थे।
बांदा के लाल पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) देवेंद्र कुमार मिश्र के कानपुर में बदमाशों से मुठभेड़ में शहीद होने की खबर से उनके पैतृक गांव सहेवा में शोक की लहर छा गई। देवेंद्र चार महीने पहले चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में ड्यूटी करने के बाद कानपुर जाते वक्त कुछ घंटों के लिए गांव आए थे और परिजनों व गांव वालों से जल्द ही दोबारा आने का वादा भी कर गए थे, लेकिन दोबारा आने की जगह गांववालों को रुला कर हमेशा-हमेशा के लिए चले गए।
सहेवा गांव के महेश प्रसाद मिश्र के तीन बेटों में सबसे बड़े देवेंद्र मिश्र पुलिस में काफी पहले भर्ती हो गए थे। अब उनके रिटायरमेंट का समय था। अगले साल ही सेवानिवृत्त होना था। हालांकि उनका परिवार बांदा और कानपुर में ज्यादा रहता है। पैतृक गांव में उनके रिश्ते के चाचा चंद्रशेखर मिश्र हैं। खपरैलदार मकान के बाहर देवेंद्र मिश्र पुलिस उपाधीक्षक की नेम प्लेट लगी है। शहादत की खबर आते ही सुबह ही खुरहंड चौकी और स्थानीय पुलिस की टुकड़ी उनके घर पहुंच गई और सांत्वना जताई। इसी बीच गांव के बुजुर्गों का जमघट लग गया।
डीजी ने किया था पुरस्कृत
क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र अपने कर्तव्यों के प्रति जागरुक और ईमानदार थे। वे बहादुर भी दे। शायद बहादुरी का यही जज्बा उनकी जान जाने का सबब बन गया। उनकी बहादुरी की बानगी थी कि वर्ष 2012 में चर्चित ट्रेन डकैती के बदमाशों को उन्होंने दबोच कर लूट का माल भी बरामद किया था। तब वे इंस्पेक्टर थे। तत्कालीन पुलिस महानिदेशक अतुल ने उन्हें 15 हजार रुपये इनाम और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। बाद में पुलिस उपाधीक्षक पद पर पदोन्नत हुए। गिरवां थाना इंस्पेक्टर शशि कुमार पांडेय ने बताया कि अगले वर्ष देवेंद्र मिश्र सेवानिवृत्त होने वाले थे।
शहीद सिपाही बबलू कुमार (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बबलू कुमार
आगरा के फतेहाबाद क्षेत्र के गांव पोखर पांडे निवासी बबलू कुमार 2018 में पुलिस में भर्ती हुए थे। कुख्यात बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम में 23 वर्षीय बबलू कुमार भी शामिल थे। गोली लगने से वो शहीद हो गए। सिपाही बबलू की शहादत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शहीद बबलू के परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं है। इनके पिता छोटेलाल राजमिस्री हैं। बबलू चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। बड़े भाई दिनेश और बृजेश भी पिता के साथ काम करते हैं। छोटे भाई उमेश ने इसी साल इंटर पास किया है। ग्रामीणों ने बताया कि बबलू की पुलिस में नौकरी लगने के बाद परिवार में उम्मीद की किरण जागी थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
आगरा के फतेहाबाद क्षेत्र के गांव पोखर पांडे निवासी बबलू कुमार 2018 में पुलिस में भर्ती हुए थे। कुख्यात बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम में 23 वर्षीय बबलू कुमार भी शामिल थे। गोली लगने से वो शहीद हो गए। सिपाही बबलू की शहादत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शहीद बबलू के परिवार की आर्थिक स्थित ठीक नहीं है। इनके पिता छोटेलाल राजमिस्री हैं। बबलू चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। बड़े भाई दिनेश और बृजेश भी पिता के साथ काम करते हैं। छोटे भाई उमेश ने इसी साल इंटर पास किया है। ग्रामीणों ने बताया कि बबलू की पुलिस में नौकरी लगने के बाद परिवार में उम्मीद की किरण जागी थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
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शहीद जितेंद्र (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
सिपाही जितेंद्र
कानपुर मुठभेड़ में शहीद हुए मथुरा जिले के सिपाही जितेंद्र गांव बरारी के रहने वाले थे। उनके परिजन तंतुरा नवादा में रहते हैं। जितेंद्र के शहीद होने की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। 26 साल के जितेंद्र दो साल पहले ही पुलिस में भर्ती हुए थे। उनकी अभी शादी नहीं हुई थी। परिवार में उनके पिता तीर्थपाल सिंह, मां व भाई-बहन हैं। जितेंद्र का अंतिम संस्कार गांव बरारी में किया जाएगा।
कानपुर मुठभेड़ में शहीद हुए मथुरा जिले के सिपाही जितेंद्र गांव बरारी के रहने वाले थे। उनके परिजन तंतुरा नवादा में रहते हैं। जितेंद्र के शहीद होने की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। 26 साल के जितेंद्र दो साल पहले ही पुलिस में भर्ती हुए थे। उनकी अभी शादी नहीं हुई थी। परिवार में उनके पिता तीर्थपाल सिंह, मां व भाई-बहन हैं। जितेंद्र का अंतिम संस्कार गांव बरारी में किया जाएगा।
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राहुल दिवाकर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर मुठभेड़ में औरैया का लाल शहीद
कानपुर नगर में पुलिस और विकास दुबे की बीच हुई मुठभेड़ में औरैया का लाल शहीद हो गया। थाना बिधूना क्षेत्र के गांव रूरूकलां के मूल निवासी के कांस्टेबल राहुल दिवाकर की शहीद होने की सूचना गांव में आते ही परिजनों में कोहराम मच गया। कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में मुठभेड़ में शहीद हुए राहुल दिवाकर ने निवास सी-205 देवेंद्रपुरी मोदीनगर गाजियाबाद में बना लिया था। शहीद सिपाही के पिता ओमकुमार दो साल पहले दरोगा पद से सेवानिवृत्त हो गए थे।
वह भी गाजियाबाद में ही रह रहे हैं। राहुल के दो भाई रवी और राकेश व एक बहन नंदनी है। नंदनी की शादी हो चुकी है। शहीद के चचेरे भाई विपिन ने बताया कि राहुल की पढ़ाई गाजियाबाद में ही हुई थी। राहुल 2016 में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ था। वर्तमान में कानपुर शहर में तैनाती थी। राहुल की फरवरी 2019 में रोहिणी निवासी दिव्या के साथ शादी हुई थी। तीन माह की एक बेटी है। शहीद के ताऊ गेंदा लाल, चाचा हरी दिवाकर सहित पूरा परिवार घटना की जानकारी मिलते ही रोते बिलखते कानपुर पहुंचा।
कानपुर नगर में पुलिस और विकास दुबे की बीच हुई मुठभेड़ में औरैया का लाल शहीद हो गया। थाना बिधूना क्षेत्र के गांव रूरूकलां के मूल निवासी के कांस्टेबल राहुल दिवाकर की शहीद होने की सूचना गांव में आते ही परिजनों में कोहराम मच गया। कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में मुठभेड़ में शहीद हुए राहुल दिवाकर ने निवास सी-205 देवेंद्रपुरी मोदीनगर गाजियाबाद में बना लिया था। शहीद सिपाही के पिता ओमकुमार दो साल पहले दरोगा पद से सेवानिवृत्त हो गए थे।
वह भी गाजियाबाद में ही रह रहे हैं। राहुल के दो भाई रवी और राकेश व एक बहन नंदनी है। नंदनी की शादी हो चुकी है। शहीद के चचेरे भाई विपिन ने बताया कि राहुल की पढ़ाई गाजियाबाद में ही हुई थी। राहुल 2016 में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ था। वर्तमान में कानपुर शहर में तैनाती थी। राहुल की फरवरी 2019 में रोहिणी निवासी दिव्या के साथ शादी हुई थी। तीन माह की एक बेटी है। शहीद के ताऊ गेंदा लाल, चाचा हरी दिवाकर सहित पूरा परिवार घटना की जानकारी मिलते ही रोते बिलखते कानपुर पहुंचा।