Kanpur Dehat Accident: कानपुर देहात सड़क हादसे में अनुराग, अर्जुन व वीरू की मौत की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग घटना स्थल व मेडिकल कॉलेज की ओर दौड़ पड़े। अस्पताल पहुंचने पर परिवार के लोगों का शव देख हाल बेहाल रहा। जिन्हें सगे संबंधी व गांव के लोग ढांढस बंधाते नजर आए। पटेल चौक पर हुए हादसे में इंदिरा नगर व हासेमऊ के युवकों की मौत से दोनों जगह सन्नाटा पसर गया। वहीं तीनों के घर पर मातम छा गया। बेटे की अनुराग की मौत पर पिता राकेश कुमार बदहवाश नजर आए।
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- फोटो : amar ujala
राकेश ने बताया कि वह नबीपुर में प्राइवेट काम करते है। शुक्रवार को काम खत्म कर घर जा रहा था इसी बीच बेटे के दुर्घटना में घायल होने की जानकारी मिली। वहीं, अर्जुन की मौत की जानकारी पर अकबरपुर के संगसियापुर से जीजा दिनेश चंद्र बहन लक्ष्मी व अन्य परिवार के लोग पहुंचे। वहीं वीरू के मामा अजय कुमार भी जा पहुंचे। अस्पताल में एक साथ तीन शव रखे देख चीख पुकार मच गई। रोते बिलखते परिजनों को पुलिस कर्मियों के अलावा अन्य लोग भी ढांढस बंधाते रहे।
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पापा कितनी देर में आओगे पूछ दूर चला गया बेटा
अनुराग की मौत पर पिता राकेश गुमसुम से नजर आए। रोते बिलखते हुए बताया वह नबीपुर में थे। बेटे ने शाम को फोन कर पूछा था पापा कितनी देर में आओगे। इस पर उसने शाम को घर आने की बात कही थी। इस बीच उसकी मौत की खबर आ गई। बिलखते हुए पिता ने बताया कि उसे नहीं मालूम था कि बेटा उससे हमेशा के लिए दूर चला जाएगा। अनुराग की मौत पर मां श्री देवी, भाई आदेश, नितिन, शनि, कौशल बिलखते रहे।
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भाई तुम मुझे छोड़ कर नहीं जा सकते
अर्जुन की मौत पर जिला अस्पताल में सबसे बुरा हाल भाई संजय उर्फ संजू का रहा। वह दहाड़े मार मार कर बिलख रहा था। कभी वह सिर पटक रहा था तो कभी भाई के शव से लिपट कर रोता नजर आए। वह बार बार यही कह रहा था भाई तुम मुझे छोड़ कर नहीं जा सकते। मुझे कुछ हो जाता मगर तुम्हें कुछ न होता। अर्जुन की मौत पर जीजा दिनेश, बहन लक्ष्मी बिलखती रही। दिनेश ने बताया कि कुछ साल पहले अर्जुन के भाई धर्मेंद्र की भी दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस घटना से परिवार टूट गया।
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घर का सहारा था छंगा, बदहवाश हो गई मां
वीरू उर्फ छंगा की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टू गया। मां गुड़्डन , बहन दीपा, निशा, प्रीना रोती बिलखती रहीं। मामा अजय ने बताया कि वीरू के पिता का निधन हो चुका है। घर पर वह अकेला कमाने वाला था। मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था। एक भाई शिशुपाल मानसिक बीमार है। बताया कि वह किस काम से घर से पुखरायां आया यह जानकारी नहीं बता सके।