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गीत, शायरी और कविताओं में आईआईटीयंस का बढ़ा रुझान, शुरू किया फेसबुक, यू- ट्यूब और इंस्टाग्राम पेज
Tue, 23 Apr 2019 05:28 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 23 Apr 2019 05:28 PM IST
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आईआईटी कानपुर
आईआईटी कानपुर में इंजीनियरिंग, तकनीकी और प्रबंधन की पढ़ाई के साथ छात्रों की दिलचस्पी गीत, शायरी और कविताओं में भी बढ़ने लगी है। छात्रों के अंदर छिपी इस प्रतिभा को निखारने के लिए सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच के छात्र दीपक जौरवाल ने नए तरह का स्टार्टअप शुरू किया है। दीपक ने छात्रों की लिखी कविताओं, गीत, नज्म और शायरी को प्रमोट करने के लिए फेसबुक, यू- ट्यूब और इंस्टाग्राम पर ‘हिंदी पंक्तियां’ नाम से पेज तैयार किया है।
आईआईटी कानपुर
खास बात है कि एक साल में आईआईटी ही नहीं दूसरे कॉलेजों के युवा भी जुड़ चुके हैं और इनकी संख्या डेढ़ लाख से भी अधिक हो चुकी है। इस पेज के माध्यम से दीपक हिंदी भाषा को भी बढ़ावा देने की कोशिश में जुटे हैं। यही नहीं इससे कमाई भी कर रहे हैं।
आईआईटी कानपुर
शेयर करते हैं कविताएं, शायरी और लेख
दीपक बताते हैं कि प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपनी शायरी, कविताएं और लेख पेज पर शेयर करने के लिए भेजते हैं। उनकी पंक्तियां उन्हीं के नाम से पेज पर शेयर की जाती हैं। इंस्टाग्राम पर अभी तक 1062 पोस्ट शेयर किए गए हैं जबकि करीब एक हजार से ज्यादा पोस्ट फेसबुक पर भी शेयर किए जा चुके हैं।
दीपक बताते हैं कि प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपनी शायरी, कविताएं और लेख पेज पर शेयर करने के लिए भेजते हैं। उनकी पंक्तियां उन्हीं के नाम से पेज पर शेयर की जाती हैं। इंस्टाग्राम पर अभी तक 1062 पोस्ट शेयर किए गए हैं जबकि करीब एक हजार से ज्यादा पोस्ट फेसबुक पर भी शेयर किए जा चुके हैं।
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आईआईटी कानपुर
ऐसे हुई शुरुआत
दीपक मूल रूप से राजस्थान के करौली के रहने वाले हैं। 2014 में आईआईटी में दाखिला लिया था। यहां आने के बाद उन्हें लगा कि लोग दूसरी भाषाओं के चक्कर में अपनी हिंदी को भूलते जा रहे हैं जबकि लोगों में हिंदी बोलने, लिखने की काफी क्षमता है। इसलिए इसे बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्ष इंस्टाग्राम पर ‘हिंदी पंक्तियां’ नाम से पेज तैयार किया। बड़ी संख्या में आईआईटीयंस इससे जुड़ गए। देखते ही देखते विदेश में रहने वाले पूर्व छात्रों ने भी अपनी कविताएं, शायरी भेजनी शुरू कर दी। कुछ लोग बड़े लेख लिखने के शौकीन थे, इसलिए पिछले माह ही फेसबुक पेज भी तैयार कर लिया। कुछ लोगों ने अपना वीडियो बनाकर भेजना शुरू किया तो उसके लिए यू-ट्यृूब का चैनल शुरू कर दिया।
दीपक मूल रूप से राजस्थान के करौली के रहने वाले हैं। 2014 में आईआईटी में दाखिला लिया था। यहां आने के बाद उन्हें लगा कि लोग दूसरी भाषाओं के चक्कर में अपनी हिंदी को भूलते जा रहे हैं जबकि लोगों में हिंदी बोलने, लिखने की काफी क्षमता है। इसलिए इसे बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्ष इंस्टाग्राम पर ‘हिंदी पंक्तियां’ नाम से पेज तैयार किया। बड़ी संख्या में आईआईटीयंस इससे जुड़ गए। देखते ही देखते विदेश में रहने वाले पूर्व छात्रों ने भी अपनी कविताएं, शायरी भेजनी शुरू कर दी। कुछ लोग बड़े लेख लिखने के शौकीन थे, इसलिए पिछले माह ही फेसबुक पेज भी तैयार कर लिया। कुछ लोगों ने अपना वीडियो बनाकर भेजना शुरू किया तो उसके लिए यू-ट्यृूब का चैनल शुरू कर दिया।
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आईआईटी कानपुर
कमाई भी शुरू हो गई
दीपक बताते हैं फॉलोअर्स ज्यादा होने के चलते लोग अपना बिजनेस भी प्रमोट करवाने के लिए मदद मांगते हैं। मैंने भी पहले अपने पेज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए खर्च किया था। इसलिए मैंने ऐसे लोगों के बिजनेस को भी बीच-बीच में प्रमोट करना शुरू कर दिया। प्रत्येक बिजनेस पोस्ट के लिए 50 रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक चार्ज लेते हैं। इस पर लोग बुक लॉचिंग का विज्ञापन भी देते हैं।
दीपक बताते हैं फॉलोअर्स ज्यादा होने के चलते लोग अपना बिजनेस भी प्रमोट करवाने के लिए मदद मांगते हैं। मैंने भी पहले अपने पेज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए खर्च किया था। इसलिए मैंने ऐसे लोगों के बिजनेस को भी बीच-बीच में प्रमोट करना शुरू कर दिया। प्रत्येक बिजनेस पोस्ट के लिए 50 रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक चार्ज लेते हैं। इस पर लोग बुक लॉचिंग का विज्ञापन भी देते हैं।