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कलेजे के टुकड़े को बचाने के लिए 4 घंटे अस्पताल में भटकता रहा बेबस बाप
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 05 Apr 2017 05:42 PM IST
सार
-कलेजे के टुकड़े को बचाने के लिए 4 घंटे भटकता रहा बेबस बाप
-स्टॉफ ने डॉक्टर और दवा न होने का हवाला देकर एडमिट करने से मना कर दिया
-बिधनू के कैंधा गांव निवासी है परिवार, एसएसपी ने व्हाट्सएप में मैसेज देखकर एडमिट कराया
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विस्तार
डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है। पर अब ऐसा लगता है कि इस धरती के भगवान का मन संवेदनहीनता से परे पैसा कमाने के लालच में मरीजों की जि़न्दगियों के साथ खेलने में रम गया हैं।
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कलेजे के टुकड़े की जान बचाने को भटकता रहा बेबस बाप
चार घंटे बाद हरकत में आया प्रशासन, बच्चे को भर्ती कर किया इलाज
- फोटो : राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
इसे डॉक्टरों की संवेदनहीनता ही कहेंगे। एक पिता अपने कलेजे के टुकड़े की जान बचाने के लिए चार घंटे तक अस्पताल में भटकता रहा लेकिन डॉक्टरों ने बच्चे को एडमिट नहीं किया। वो डॉक्टर समेत स्टॉफ के आगे मिन्नते करता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन किसी का कलेजा नहीं पसीजा। एक अंजान शख्स ने जब उसकी दयनीय हालत देखी तो उससे रहा नहीं गया। उसने फौरन वीडियो बना लिया और व्हाट्सएप पर वायरल कर दिया। इसके बाद एसएसपी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सीओ को मौके पर भेजा और पीड़ितों की मदद करने का आदेश दिया।
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मासूम की फट गई थी आंत
मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस भी पहुंची अस्पताल
- फोटो : राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
बिधनू के कैंधा गांव में रहने वाले दयाशंकर मजदूरी करते है। उनके परिवार पत्नी यशोदा और डेढ़ महीने का एकलौता बेटा है। सोमवार को वो सुबह से रो रहा था। परिजनों ने पहले उसे चुप कराने की कोशिश की, लेकिन जब वो चुप नहीं हुआ तो वे उसको बर्रा स्थित डॉक्टर के क्लीनिक ले गए। डॉक्टर ने उसकी गंभीर हालत को देख अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला कि उसकी आंत फट गई है।
इस पर डॉक्टर ने उसे कानपुर के हैलट अस्पताल भेज दिया। वे शाम करीब आठ बजे बच्चे को लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे, लेकिन स्टॉफ ने यह कहते हुए उसको एडमिट करने से मना कर दिया कि यहां पर न तो डॉक्टर है और न ही दवा। इस पर दयाशंकर और उसकी पत्नी यशोदा बेटे की गंभीर हालत की दुहाई देकर उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा, लेकिन उनका कलेजा नहीं पसीजा। इस पर उसने डॉक्टरों से कहा, लेकिन वे भी उसकी अनदेखी कर चले गए।
इस पर डॉक्टर ने उसे कानपुर के हैलट अस्पताल भेज दिया। वे शाम करीब आठ बजे बच्चे को लेकर हैलट इमरजेंसी पहुंचे, लेकिन स्टॉफ ने यह कहते हुए उसको एडमिट करने से मना कर दिया कि यहां पर न तो डॉक्टर है और न ही दवा। इस पर दयाशंकर और उसकी पत्नी यशोदा बेटे की गंभीर हालत की दुहाई देकर उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा, लेकिन उनका कलेजा नहीं पसीजा। इस पर उसने डॉक्टरों से कहा, लेकिन वे भी उसकी अनदेखी कर चले गए।
चार घंटे तक गेट पर बैठा रोता रहा
डेमो
हैलट प्रशासन की अनदेखी पर वो गेट पर बेटे को गोद में लिए करीब चार घंटे बैठा रहा। इसी बीच एक अंजान शख्श ने मामले को समझकर उसकी आपबीती को व्हाट्सएप ग्रुप में डाल दिया। इसके बाद वो मैसेज इतना वायरल हो गया कि एसएसपी के पास पहुंच गया। एसएसपी ने तुरन्त मैसेज को संज्ञान लेकर सीओ स्वरूपनगर को हैलट भेजकर बच्चे को एडमिट कराया।
बिधनू के कैंधा गांव निवासी मजदूर दयाशंकर का बेटा डेढ़ महीने का है। मां यशोदा और एकलौता बेटा है। अपने आप आंत फट गई हैं। बर्रा में अल्ट्रासाउंड में पता चला। हैलट में रात 8 बजे से 12 बजे तक नहीं किया भर्ती।
बिधनू के कैंधा गांव निवासी मजदूर दयाशंकर का बेटा डेढ़ महीने का है। मां यशोदा और एकलौता बेटा है। अपने आप आंत फट गई हैं। बर्रा में अल्ट्रासाउंड में पता चला। हैलट में रात 8 बजे से 12 बजे तक नहीं किया भर्ती।