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हवा बनेगी जहर, ये तो सिर्फ एक Trailer है Picture अभी बाकी है
हिमांशू मिश्रा, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 14 Nov 2017 09:42 AM IST
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प्रदूषण से स्थिति इतनी खराब हो जाएगी ये शायद ही किसी ने सोचा होगा लेकिन आज स्थिति बद से बदतर हो चुकी है और आगे तो विशेषज्ञ स्थिति भी खराब होना की बात कह रहे हैं। महानगर की हवा धीरे-धीरे जहर बन रही है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।
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आईआईटी कानपुर के शोधार्थी सार्थ के गुटीकुंडा, राहुल गोयल ओर पल्लवी पंत ने मिलकर यह रिसर्च की है। रिसर्च को एल्सएवियर जर्नल ने प्रकाशित किया है। आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर एनवायरमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञ प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि ऐसी स्थिति में अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भयावह हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में तत्काल प्रभाव से निरीक्षण होना चाहिए और वहां प्रदूषण की स्थिति देखनी चाहिए। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
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डेढ़ साल में बंद हो चुकीं 60 इंडस्ट्री
प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार फैक्ट्री मालिकों को चेतावनी जारी कर रहा है लेकिन इसके बावजूद इसपर रोक नहीं लग पा रही। पिछले डेढ़ साल में बोर्ड ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए शहर की 60 फैक्ट्रियों पर ताला लगवा दिया। ढाई सौ से ज्यादा बार जुर्माना लगाया गया व अन्य कार्रवाई भी हो चुकी है। करीब 700 फैक्ट्री और टेनरी को नोटिस जारी हो चुकी हैं पर अधिकतर कार्यवाही कागजी ही होती है इसलिए प्रदूषण पर लगाम नहीं कस पाती।
प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार फैक्ट्री मालिकों को चेतावनी जारी कर रहा है लेकिन इसके बावजूद इसपर रोक नहीं लग पा रही। पिछले डेढ़ साल में बोर्ड ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए शहर की 60 फैक्ट्रियों पर ताला लगवा दिया। ढाई सौ से ज्यादा बार जुर्माना लगाया गया व अन्य कार्रवाई भी हो चुकी है। करीब 700 फैक्ट्री और टेनरी को नोटिस जारी हो चुकी हैं पर अधिकतर कार्यवाही कागजी ही होती है इसलिए प्रदूषण पर लगाम नहीं कस पाती।
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हवा के साथ पानी को भी जहरीला कर रहे उद्योग
शहर में सबसे ज्यादा टेनरी, होजरी और केमिकल इंडस्ट्री हैं। ये इंडस्ट्री हवा के साथ-साथ पानी को भी जहरीला बना रही हैं। आईआईटी शोधार्थियों की रिसर्च के मुताबिक इन इंडस्ट्री से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड भारी मात्रा में निकल रहे हैं। इसके अलावा इन इंडस्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा में छोड़ दिया जाता है जिससे गंगा के साथ-साथ भूगर्भ जलभी प्रदूषित हो रहा है।
शहर में सबसे ज्यादा टेनरी, होजरी और केमिकल इंडस्ट्री हैं। ये इंडस्ट्री हवा के साथ-साथ पानी को भी जहरीला बना रही हैं। आईआईटी शोधार्थियों की रिसर्च के मुताबिक इन इंडस्ट्री से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड भारी मात्रा में निकल रहे हैं। इसके अलावा इन इंडस्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा में छोड़ दिया जाता है जिससे गंगा के साथ-साथ भूगर्भ जलभी प्रदूषित हो रहा है।
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नगर निगम का दावा खूब उठाते हैं कूड़ा
नगर निगम प्रशासन का दावा है कि शहर से प्रतिदिन 1100 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसमें से 1050 मीट्रिक टन कूड़ा शहर से उठाकर पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट पर ले जाया जाता है। यहां कूड़े से जैविक खाद बनाने का काम शुरू हुआ है। हालांकि यह काम काफी धीरे हो रहा है और कूड़े के पहाड़ लगे हुए हैं जिससे आबो-हवा जहरीली हो रही है।
नगर निगम प्रशासन का दावा है कि शहर से प्रतिदिन 1100 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसमें से 1050 मीट्रिक टन कूड़ा शहर से उठाकर पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट पर ले जाया जाता है। यहां कूड़े से जैविक खाद बनाने का काम शुरू हुआ है। हालांकि यह काम काफी धीरे हो रहा है और कूड़े के पहाड़ लगे हुए हैं जिससे आबो-हवा जहरीली हो रही है।