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आईआईटी कानपुर के दलित प्रोफेसर के उत्पीड़न में 4 प्रोफेसर दोषी

Wed, 29 Aug 2018 08:51 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 29 Aug 2018 08:51 AM IST
सार

- रिटायर्ड जजों की कमेटी ने निदेशक को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में बताया दोषी
- बोर्ड ऑफ गवर्नेंस ने शुक्रवार को बुलाई बैठक, तय हो सकती है कार्रवाई
- 11 को नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट आईआईटी के निदेशक और बीओजी से लेगा पूरी जानकारी

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Four Professor guilty of harassment of Dalit Professor of IIT Kanpur
गर्ल्स हॉस्टल का मामला, छात्र कल्याण अधिष्ठाता से की शिकायत
आईआईटी कानपुर के दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न के मामले मेें चारों सीनियर प्रोफेसरों पर कार्रवाई हो सकती है। मामले की जांच कर रही रिटायर्ड जजों की कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार कमेटी ने चारों प्रोफेसरों को उत्पीड़न का दोषी माना है। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं रिपोर्ट मिलते ही इंस्टीट्यूट के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) चेयरमैन आरसी भार्गव ने बोर्ड की आपात बैठक शुक्रवार को बुला ली है। इस बैठक में रिपोर्ट पर चर्चा के बाद चारों प्रोफेसरों पर कार्रवाई की मुहर लग सकती है।

 
Four Professor guilty of harassment of Dalit Professor of IIT Kanpur
आईआईटी कानपुर
नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) ने पूरे मामले की जानकारी के लिए आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर और बीओजी चेयरमैन को 11 सितंबर को तलब किया है। दोनों से आयोग पूरे मामले में अभी तक की रिपोर्ट मांगेगी। ऐसे में संभव है कि बीओजी शुक्रवार को ही चारों प्रोफेसरों पर कार्रवाई तय कर दे। मामले में डॉ. सडरेला ने आईआईटी कानपुर के सीनियर प्रोफेसर और हाल में आईआईटी धनबाद के निदेशक बनाए गए डॉ. राजीव शेखर, प्रो. सीएस उपाध्याय, प्रो. ईशान शर्मा और प्रो. संजय मित्तल को आरोपी बनाया है। 
 
Four Professor guilty of harassment of Dalit Professor of IIT Kanpur
कानपुर आईआईटी
एनसीएससी ने दिए थे एफआईआर के निर्देश, कोर्ट ने लगाई थी रोक
नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) ने आईआईटी के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल को अप्रैल में आदेश जारी कर कहा था कि वे चारों प्रोफेसरों को तत्काल सस्पेंड करें और उन पर एफआईआर दर्ज करवाएं। हालांकि कार्रवाई होने से पहले ही चारों प्रोफेसरों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आयोग के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद रिटायर्ड जजों की कमेटी ने मामले की दोबारा जांच की है।
 
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Four Professor guilty of harassment of Dalit Professor of IIT Kanpur
आईआईटी कानपुर
गंभीर धाराओं में हो सकती है एफआईआर
सूत्रों के अनुसार रिटायर्ड जजों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कार्रवाई को लेकर सिफारिश भी की है। इसमें कहा है कि चारों प्रोफेसरों पर एससी-एसटी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हो सकती है। ऐसी स्थिति में मौजूदा कानून के हिसाब से चारों प्रोफेसरों पर जेल जाने का भी खतरा मंडरा रहा है। 
 
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Four Professor guilty of harassment of Dalit Professor of IIT Kanpur
आईआईटी कानपुर
यह था मामला
एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष के छात्र रहे डॉ. सडरेला को जनवरी में इसी विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति मिली थी। इस पर प्रो. राजीव शेखर, प्रो. सीएस उपाध्याय, प्रो. ईशान शर्मा, प्रो. संजय मित्तल सहित दस से ज्यादा प्रोफेसरों ने नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। निदेशक से नियुक्ति की निंदा की थी। इसके कुछ दिनों बाद प्रो. सडरेला ने प्रोफेसरों पर जातिगत टिप्पणी और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। निदेशक ने पहले इस मामले की जांच एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक की अध्यक्षता वाली समिति से कराई। इसमें ये चारों प्रोफेसर दोषी पाए गए। इसके बाद इंस्टीट्यूट की बीओजी ने जांच रिटायर्ड जजों की कमेटी को सौंप दी थी। तब से यह कमेटी चारों प्रोफेसरों की जांच में जुटी थी। 
 
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