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सीए संस्थान का दीक्षांत समारोह, 5 राज्यों के नए नवेले 565 चार्टर्ड अकॉउंटेंट्स को दिए गए प्रमाण पत्र
Sun, 05 Jan 2020 02:39 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 05 Jan 2020 02:39 PM IST
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सीए संस्थान का दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया के दीक्षांत समारोह में अक्तूबर-2019 में परीक्षा पास करने वाले पांच राज्यों के 565 चार्टर्ड एकाउंटेंटों को प्रमाण पत्र दिए गए। शनिवार को कानपुर के मोतीझील स्थित लाजपत भवन में सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल की ओर से हुए समारोह में सभी सीए ने अग्नि को साक्षी मानकर जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने की शपथ भी ली।
सीए संस्थान का दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
सेंट्रल काउंसिल मेंबर सीए मनु अग्रवाल ने कहा कि बीते कुछ वर्षों से कानपुर सीए को रोजगार दिलाने का गढ़ बना हुआ है। भविष्य में प्लेसमेंट के और भी अवसर खुलेंगे। चार्टर्ड एकाउंटेंटों को प्रमाण पत्र अनुज गोयल, केमिसा सोनी, सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के सचिव अभिषेक पांडेय, सदस्य अतुल मेहरोत्रा ने दिए। संस्थान के प्रेसिडेंट प्रफुल्ल कुमार छाजड़ और वाइस प्रेसिडेंट अतुल कुमार गुप्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशे की गंभीरता समझाई।
सीए संस्थान का दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
90 फीसदी आर्थिक समस्याएं हल कर रहे सीए
अभिषेक पांडेय ने कहा कि आज के सीए भाग्यशाली हैं कि देश में हो रहे आर्थिक बदलावों के साक्षी बन रहे। इन्हीं आर्थिक बदलावों की पढ़ाई करके आ रहे हैं। देश में 90 फीसदी आर्थिक समस्याएं चार्टर्ड एकाउंटेंटों के जरिये हल हो रही हैं, इसलिए जिम्मेदारी समझें।
इस पेशे में केवल काबिलियत आती काम
सेंट्रल काउंसिल मेंबर सीए अनुज गोयल ने कहा कि यह ऐसा पेशा है, जिसमें आरक्षण नहीं चलता। यहां सिर्फ काबिलियत और मेहनत काम आती है। उदाहरण दिया कि बिड़ला परिवार के बेटे कुमार मंगलम भी आप सभी लोगों की तरह ही पढ़ाई करके सीए बने हैं। उन्हें अन्य प्रोफेशन की तरह उद्योगपतियों वाले संसाधन नहीं मिले। यही इस पेशे की खूबसूरती है।
अभिषेक पांडेय ने कहा कि आज के सीए भाग्यशाली हैं कि देश में हो रहे आर्थिक बदलावों के साक्षी बन रहे। इन्हीं आर्थिक बदलावों की पढ़ाई करके आ रहे हैं। देश में 90 फीसदी आर्थिक समस्याएं चार्टर्ड एकाउंटेंटों के जरिये हल हो रही हैं, इसलिए जिम्मेदारी समझें।
इस पेशे में केवल काबिलियत आती काम
सेंट्रल काउंसिल मेंबर सीए अनुज गोयल ने कहा कि यह ऐसा पेशा है, जिसमें आरक्षण नहीं चलता। यहां सिर्फ काबिलियत और मेहनत काम आती है। उदाहरण दिया कि बिड़ला परिवार के बेटे कुमार मंगलम भी आप सभी लोगों की तरह ही पढ़ाई करके सीए बने हैं। उन्हें अन्य प्रोफेशन की तरह उद्योगपतियों वाले संसाधन नहीं मिले। यही इस पेशे की खूबसूरती है।
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सीए संस्थान का दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
कारपोरेट जगत में धाक जमा रहीं बेटियां
कारपोरेट जगत में अब सिर्फ पुरुषों का ही दखल नहीं रहा। इसमें बेटियां भी बराबरी से धाक जमा रही हैं। इसकी बानगी सीए और सीएस के रिजल्ट में देखने को मिलती है, या फिर कैंपस प्लेसमेंट के लिए जब कंपनियां इंटरव्यू लेने शहर आती हैं। शनिवार को मोतीझील में सीए संस्थान के दीक्षांत समारोह में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां लड़कियां संख्या बल में लड़कों से बराबरी करती नजर आईं। पांच वर्ष की कठिन पढ़ाई करके वर्ष 2019 में परीक्षा पास कर चुके युवाओं को सीए संस्थान की सदस्यता दी गई। पांच राज्यों से आए 565 सदस्यों में 230 लड़कियां थीं। इनसे में 70 फीसदी लड़कियां पांच से 15 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर जॉब हासिल कर चुकी हैं।
कारपोरेट जगत में अब सिर्फ पुरुषों का ही दखल नहीं रहा। इसमें बेटियां भी बराबरी से धाक जमा रही हैं। इसकी बानगी सीए और सीएस के रिजल्ट में देखने को मिलती है, या फिर कैंपस प्लेसमेंट के लिए जब कंपनियां इंटरव्यू लेने शहर आती हैं। शनिवार को मोतीझील में सीए संस्थान के दीक्षांत समारोह में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां लड़कियां संख्या बल में लड़कों से बराबरी करती नजर आईं। पांच वर्ष की कठिन पढ़ाई करके वर्ष 2019 में परीक्षा पास कर चुके युवाओं को सीए संस्थान की सदस्यता दी गई। पांच राज्यों से आए 565 सदस्यों में 230 लड़कियां थीं। इनसे में 70 फीसदी लड़कियां पांच से 15 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर जॉब हासिल कर चुकी हैं।
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सीए संस्थान का दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
एकलौती बेटी ने गाड़ा सफलता का झंडा
पदम अपार्टमेंट, सिविल लाइंस निवासी शैली सिंहानिया लोहिया कार्प में जॉब करती हैं। लोहिया ने इसी वर्ष इन्हें कैंपस प्लेसमेंट में सबसे ज्यादा 10 लाख रुपये सालाना वेतन का पैकेज दिया। शैली भविष्य में प्रबंधन की पढ़ाई करने का इरादा रखती हैं। पिता संतोष सिंहानिया मोबाइल पार्ट्स के व्यवसायी हैं। बेटी की सफलता से घर में सभी गदगद हैं। शैली बताती हैं कि सीए की पढ़ाई लड़कियों के लिए इसलिए भी मुफीद है क्योंकि शहर में इसकी पढ़ाई संभव है। इस पेशे में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तरह पढ़ाई का खर्चा बहुत कम है। कम से कम आय वाला व्यक्ति भी इसकी पढ़ाई कर सकता है।
पदम अपार्टमेंट, सिविल लाइंस निवासी शैली सिंहानिया लोहिया कार्प में जॉब करती हैं। लोहिया ने इसी वर्ष इन्हें कैंपस प्लेसमेंट में सबसे ज्यादा 10 लाख रुपये सालाना वेतन का पैकेज दिया। शैली भविष्य में प्रबंधन की पढ़ाई करने का इरादा रखती हैं। पिता संतोष सिंहानिया मोबाइल पार्ट्स के व्यवसायी हैं। बेटी की सफलता से घर में सभी गदगद हैं। शैली बताती हैं कि सीए की पढ़ाई लड़कियों के लिए इसलिए भी मुफीद है क्योंकि शहर में इसकी पढ़ाई संभव है। इस पेशे में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तरह पढ़ाई का खर्चा बहुत कम है। कम से कम आय वाला व्यक्ति भी इसकी पढ़ाई कर सकता है।