कानपुर के यतीमखाना चौराहे की रहने वाली शगुफ्ता (38) की रैपिड कार्ड से कोरोना की जांच निगेटिव आई लेकिन लक्षण कोरोना के ही थे। उनका ऑक्सीजन लेवल घटता गया और आखिर में मौत हो गई। इससे पहले परिजन नगर निगम स्थित कमांड सेंटर में दो घंटे तक जांच के लिए परेशान रहे, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
बाद में डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल ले गए, वहां से हैलट भेज दिया गया। रास्ते में जान चली गई। सबसे पहले वह निजी अस्पताल में भर्ती हुई थीं, लेकिन वहां आक्सीजन नहीं थी। शगुफ्ता अली को रविवार शाम बांसमंडी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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रोगी का ऑक्सीजन लेवल 50 तक आ गया तो अस्पताल वाले भगाने लगे। 30 हजार रुपये बिल भी बना दिया। परिजन ऑक्सीजन ले आए, रोगी फिर भी नहीं रुकने दिया। इसके बाद परिजन कमांड सेंटर गए। रोगी के भांजे अल्ताफ आलम ने बताया कि सारा दिन परेशान रहे लेकिन कहीं इलाज नहीं मिला।
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सीएमओ और दूसरे अधिकारियों को फोन मिलाया लेकिन नो रिप्लाई रहा। एक्सरे रिपोर्ट में फेफड़ों में दिक्कत बताई गई थी। गंभीर रोगियों के परिजन सुबह से शाम तक कमांड सेंटर फोन मिलाते रहे लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला।
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कृष्णानगर के रहने वाले बाबूलाल शर्मा (76) कैंसर रोगी हैं और कोरोना पॉजीटिव भी आ गए हैं। उनका ऑक्सीजन लेवल 40 तक पहुंच गया था। कमांड सेंटर में कोई बताने वाला नहीं था कि रोगी को कहां ले जाकर भर्ती कराएं। किसी अधिकारी ने भी रिस्पांस नहीं दिया। बाद में किसी तरह चांदनी में भर्ती हो पाए। वहां भी वेंटिलेटर नहीं मिला।