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नवरात्र: ये पूजन विधि दुर्भाग्य को दूर कर सौभाग्य को देगी न्यौता, देवी आराधना से जुड़ी पूर्ण जानकारी
Sat, 06 Apr 2019 11:29 AM IST
शिखा पांडेय
शिखा पाण्डेय, अमर उजाला, कानपुर
शिखा पाण्डेय, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 06 Apr 2019 11:29 AM IST
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नवरात्र (फाइल फोटो)
चैत्र नवरात्र आज से प्रारम्भ हो गए हैं और 14 अप्रैल रविवार को समाप्त होंगे। आदिशक्ति को प्रसन्न करने का यही सबसे उत्तम समय माना गया है। देवी आराधना का पर्व नवरात्र साल में दो बार मनाई जाता है। पहला चैत्र और दूसरा शारदीय नवरात्र। नौ दिनों तक शक्ति की उपासना देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों के रूप में की जाती है।
नवरात्र (फाइल फोटो)
- फोटो : self
नवरात्र घट स्थापना विधि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी खास बातें
- नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना होती है, फिर नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की विशेष पूजा और आराधना होती है।
- कलश स्थापना कर नवरात्र पर समस्त दैवीय शक्तियों का आह्रान कर उन्हें सक्रिय किया जाता है।
- नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना होती है, फिर नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की विशेष पूजा और आराधना होती है।
- कलश स्थापना कर नवरात्र पर समस्त दैवीय शक्तियों का आह्रान कर उन्हें सक्रिय किया जाता है।
नवरात्र (फाइल फोटो)
- नवरात्र पर कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना करते ही नवरात्र का पवित्र पर्व शुरू हो जाता है। घटस्थापना करते समय मिट्टी में जौ (यव) बोए जाते हैं। इसके बाद गंगाजल, चंदन, फूल, दूर्वा, अक्षत, सुपारी और सिक्के कलश में रखें। कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर नया लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद नारियल और कलश पर मौली बांधे, रोली से कलश पर स्वास्तिक बनाएं। वहीं कलश में शुद्ध जल और गंगा जल रखें।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
- फोटो : SELF
- इस बार चैत्र नवरात्र के आठवें दिन अष्टमी और नवमी एक साथ मनाई जाएंगी। 14 अप्रैल को राम नवमी पर इस बार पुष्य नक्षत्र योग का संयोग बन रहा है। भगवान राम का जन्म भी पुष्य नक्षत्र में ही हुआ था।
- चैत्र नवरात्र अष्टमी के दिन ही सुबह 8 बजकर 19 मिनट को नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सुबह 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगी। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में दोपहर को हुआ था इसलिए राम नवमी अष्टमी के दिन मनाना शुभ रहेगा।
- चैत्र नवरात्र अष्टमी के दिन ही सुबह 8 बजकर 19 मिनट को नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन सुबह 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगी। भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र में दोपहर को हुआ था इसलिए राम नवमी अष्टमी के दिन मनाना शुभ रहेगा।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
- फोटो : SELF
- चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर 2076 शुरू होगा। इस बार चैत्र नवरात्र रेवती नक्षत्र के साथ शुरू हो रही है। 7- 9 दिनों के इस चैत्र नवरात्र में पांच बार सर्वार्थ सिद्धि और दो बार रवियोग आएगा। जो ज्योतिष दृष्टि से बहुत ही शुभ माना गया है।