B'Day Special: 26 साल की उम्र में याेगी बने थे सांसद,जानिए खास बातें
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एक संन्यासी कैसे सत्ता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचता है, आज इस बात की सबसे बड़ी मिसाल हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ... तमाम अटकलों के बाद आखिरकार तय हो गया है कि देश में मोदीराज है तो उत्तर प्रदेश में योगीराज।
उत्तराखंड का अजय कैसे बना यूपी का योगी आदित्यनाथ ?
5 जून 1972 को उत्तराखंड के एक राजपूत परिवार में जन्मा एक बालक जिसका नामकरण हुआ अजय सिंह बिष्ट। अजय ने उत्तराखंड में ही शिक्षा ग्रहण की और गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बीएससी की डिग्री ली। ग्रेजुएशन करने के बाद अजय सिंह ने गोरखपुर में गुरु गोरखनाथ पर शोध करना शुरू किया, जहां गोरक्षनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की निगाह उन पर पड़ी। महंत जी के सान्निध्य में अजय सिंह का झुकाव अध्यात्म की तरफ हो गया।उन्होंने 22 वर्ष की उम्र में सांसारिक जीवन त्याग कर सन्यास गृहण कर लिया। जिसके बाद महंत ने अजय सिंह को नया नाम दिया योगी अदित्यनाथ।
पूर्वांचल की राजनीति में उनकी पकड़ अच्छी मानी जाती है। गोरखपुर से सांसद और गोरक्षनाथ पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ कई बार अपने बयानों को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। लव जेहाद और धर्मांतरण जैसे मसलों पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। योगी धर्मांतरण के खिलाफ और घर वापसी के लिए काफी चर्चा में रहे। 2005 में योगी आदित्यनाथ ने कथिततौर पर 1800 ईसाइयों का शुद्धीकरण कर हिन्दू धर्म में शामिल कराया। ईसाइयों के इस शुद्धीकरण का काम उत्तर प्रदेश के एटा जिले में किया गया।
मात्र 26 साल की उम्र में बन गए थे सांसद
गोरखपुर संसदीय क्षेत्र पर हमेशा से गोरक्षपीठ का दबदबा रहा है। योगी से पहले उनके गुरु अवैद्यनाथ यहां से सांसद चुने जाते रहे और जब महंत अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया तो योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। यहीं से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई। 1998 में योगी 26 साल की उम्र में पहली बार गोरखपुर से संसदीय चुनाव जीते।12वीं लोकसभा के लिए हुए उस चुनाव में योगी आदित्यनाथ सबसे कम उम्र के सांसद थे। तब से लेकर अबतक, वो लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं।