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बिकरू कांड: आईपीएस अनंत देव और विकास के खजांची जय की फोन पर होती थीं अक्सर बातें, सीडीआर से खुलासा
Sun, 08 Nov 2020 03:01 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 08 Nov 2020 03:01 PM IST
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जय बाजपेई के साथ आईपीएस अनंत देव
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड में एसआईटी की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। कानपुर के पूर्व एसएसपी और बिकरू कांड के आरोपी जय बाजपेई के बीच फोन पर कई बार बातचीत होने की पुष्टि हुई है। मोबाइल नंबरों की सीडीआर यह खुलासा हुआ है। एसआईटी ने इसको जांच रिपोर्ट में शामिल किया है।
विकास दुबे कांड: शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, जय बाजपेई
- फोटो : amar ujala
सूत्रों के मुताबिक एसएसपी के जरिये जय पुलिसकर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग भी कराता था। एसआईटी ने 100 से अधिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। यहां एसएसपी रहे एक आईपीएस की भी बड़ी भूमिका है।
गैंगस्टर जय बाजपेई और विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
एसएसपी ने संपत्ति बनवाने में की मदद
एसआईटी ने जांच में जय की संपत्तियों का ब्योरा भी जुटाया है। सूत्रों के अनुसार इसमें उसकी पचास से अधिक संपत्तियों का जिक्र है। इनमें विकास दुबे का भी पैसा लगा था। संपत्ति बनाने में जो अड़चनें आती थीं, जय एसएसपी के जरिये उन्हें हल करवाता था। जेल भेजे गए एसओ विनय तिवारी को एसएसपी की शह मिली थी, एसआईटी की जांच में ये तथ्य भी शामिल है।
एसआईटी ने जांच में जय की संपत्तियों का ब्योरा भी जुटाया है। सूत्रों के अनुसार इसमें उसकी पचास से अधिक संपत्तियों का जिक्र है। इनमें विकास दुबे का भी पैसा लगा था। संपत्ति बनाने में जो अड़चनें आती थीं, जय एसएसपी के जरिये उन्हें हल करवाता था। जेल भेजे गए एसओ विनय तिवारी को एसएसपी की शह मिली थी, एसआईटी की जांच में ये तथ्य भी शामिल है।
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विकास दुबे के करीबी जय का सटोरियों से कनेक्शन
- फोटो : अमर उजाला
तहसीलदार और लेखपाल भी गुनहगार
विकास दुबे अपराध के जरिये जो संपत्ति बनाईं थीं, एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि तहसीलदार और लेखपाल की इसमें बड़ी भूमिका रही। ग्रामीणों के बयानों के आधार पर एसआईटी ने इसे भी जांच में शामिल किया है। इस बात का भी जिक्र है कि ग्रामीण जब इन अफसरों के पास जाते थे तो इनकी कोई सुनवाई नहीं होती थी। दर्जन भर से अधिक लेखपाल और तहसीलदार इसमें शामिल हैं। सभी पर कार्रवाई तय है।
विकास दुबे अपराध के जरिये जो संपत्ति बनाईं थीं, एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि तहसीलदार और लेखपाल की इसमें बड़ी भूमिका रही। ग्रामीणों के बयानों के आधार पर एसआईटी ने इसे भी जांच में शामिल किया है। इस बात का भी जिक्र है कि ग्रामीण जब इन अफसरों के पास जाते थे तो इनकी कोई सुनवाई नहीं होती थी। दर्जन भर से अधिक लेखपाल और तहसीलदार इसमें शामिल हैं। सभी पर कार्रवाई तय है।
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जय बाजपेई के साथ आईपीएस अनंत देव
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड में एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषी अफसरों पर कार्रवाई तय है। सूत्रों के अनुसार जिन भी सरकारी अधिकारियों के नाम एसआईटी की रिपोर्ट में दिए गए हैं और जिनको चेतावनी देने की संस्तुति की गई है। उन सबकी आर्थिक स्थितियों के बारे में भी जानकारी जुटाने के भी निर्देश दिए गए हैं।