बांदा में सीबीआई ने सजा के लिए एम्स में कराए गए बच्चों के मेडिकल और इलेक्ट्रिनक साक्ष्य में गंदे वीडियो की पेन ड्राइव अदालत को सौंपी। अदालत ने गंदे वीडियो का अवलोकन करने पर उसे दोषी पाया। नाबालिगों के साथ यौन शोषण के इस बहुचर्चित मामले में सीबीआई ने लंबी कोशिशों के बाद मासूमों के यौन शोषण और अश्लील वीडियो व फोटो विदेशों तक बेचकर लाखों कमाने वाले निलंबित जेई रामभवन को दबोचा था।
पेन ड्राइव, लैपटॉप, मोबाइल जैसे पुख्ता साक्ष्य बरामद करने के साथ उसे सलाखों के पीछे पहुंचाया और पूरे नेटवर्क की तलाश में जुट गई थी। सीबीआई की कोशिशें रंग लाई और करीब 12 साल पहले के वीडियो फुटेज के आधार पर पीड़ितों की पहचान होने लगी।
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सीबीआई के दरोगा पुरुषोत्तम कुमार व सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह, दोषी रामभवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करीब 34 पीड़ितों की पहचान की गई जो हैवानियत का शिकार बने। उधर, पति रामभवन के ऊपर शिकंजा कसते देख उसकी पत्नी दुर्गावती ने बचाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। इसमें सबसे अहम कड़ी पीड़ित बच्चे और उनके अभिभावक रहे।
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फैसले के बाद दोषी दुर्गावती को न्यायलय से ले जातीं महिला पुलिसकर्मी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रामभवन की पत्नी ने इन रुपयों को ही अपना हथियार बनाया
सीबीआई सूत्र बताते हैं कि घिनौने कारनामे से लाखों कमाने वाले रामभवन की पत्नी ने इन रुपयों को ही अपना हथियार बनाया। सीबीआई गवाहों की सूची बना रही थी, उधर दुर्गावती ने ऐसे लोगों को तोड़ने की दिशा में हर तिकड़म अपनाना शुरू कर दिया था।
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दोषी रामभवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इलेक्ट्रानिक साक्ष्य और पीड़ित बच्चों के एम्स में हुआ मेडिकल बना आधार
सीबीआई के यह इलेक्ट्रानिक साक्ष्य और पीड़ित बच्चों के एम्स में कराए मेडिकल को आधार बनाया। सीबीआई की पूछताछ में आरोपी रामभवन ने बताया कि वह पांच से 16 साल के बच्चों को शिकार बनाता था।
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सीबीआई के दरोगा पुरुषोत्तम कुमार व सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह, दोषी दुर्गावती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्हें जाल में फंसाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का लालच देता था। आरोपी सोशल मीडिया पर भी यह सामग्री शेयर करता था। पीड़ित परिवारों को तस्वीरें दिखाकर ब्लैकमेल कर रुपये मांगता था।