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जानिए अटल कैसे बने ‘राजनीति के पितामह’, गंगा किनारे कुछ ऐसे सजाते थे कविताओं की महफिल
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 17 Aug 2018 11:46 AM IST
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अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
भारतीय राजनीति के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी शुरूआत में पत्रकार बनाना चाहते थे। 1945 में कानपुर के डीएवी कॉलेज में राजनीति शास्त्र से एमए करने आ गए। डीएवी कॉलेज के माहौल ने उन्हें राजनीति में दिलचस्पी रखने को मजबूर कर दिया और बाद में उन्हें भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह कहा गया।
अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
अटल जी डीएवी कॉलेज के गांधी ब्लॉक में कमरा-नं.104 में रोजाना बैठकें करते थे। राजनीतिक मुद्दों पर बहस छिड़ती और वह खुलकर वह अपनी बातें रखते। अटल जी जब कॉलेज में भाषण देते तो बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकजुट हो जाते। अटल जी कविताओं के माध्यम से लोगों के दिलों को छू लेते थे।
कानपुर में अटल बिहारी वाजपेयी
डीएवी कॉलेज में राजनीतिशास्त्र के गुरु रहे डॉ. मदन मोहन पांडेय के पुत्र डॉ. केके पांडेय बताते हैं कि उनके पिता अक्सर घर में अटल जी की चर्चा किया करते थे। वह बताते थे कि अटल जी उनसे भी देश और दुनिया की राजनीति पर लंबी चर्चा किया करते थे। उनसे राजनीतिक दांव-पेंच सीखते थे।
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अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
अटल जी जब पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने तबभी उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. मदन मोहन पांडेय का जिक्र किया। उन्होंने डॉ. पांडेय और राजनीति शास्त्र के तत्कालीन विभागाध्यक्ष रहे डॉ. शांति नंदन को अपना राजनीतिक गुरु बताया था।
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अटल बिहारी वाजपेई
- फोटो : amar ujala
गंगा किनारे सजती थी कविताओं की महफिल
कानपुर में पढ़ाई के दौरान अटल जी कविताओं के लिए काफी प्रचलित हो गए। गर्मी के दिनों में अक्सर शाम को गंगा किनारे उनकी महफिल सजती जिसमें उनके दोस्त शामिल होते थे।
कानपुर में पढ़ाई के दौरान अटल जी कविताओं के लिए काफी प्रचलित हो गए। गर्मी के दिनों में अक्सर शाम को गंगा किनारे उनकी महफिल सजती जिसमें उनके दोस्त शामिल होते थे।