कानपुर में डीएमएसआरडीई में चार दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दौरान वैज्ञानिकों ने लड़ाकू विमान तेजस को और उन्नत व शक्तिशाली बनाने पर मंथन किया। लड़ाकू विमान के पहियों, इसके इंजन, वार हेड ले जाने की क्षमता पर अलग-अलग विचार रखे।
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लड़ाकू विमान तेजस (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
इस दौरान बताया गया कि लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस से कहीं उन्नत संस्करण एडवांस मीडियम कॉम्बेट एयरक्र क्रॉफ्ट (एम्का) पर काम शुरू कर दिया गया है। सुपरसोनिक रफ्तार से भी तेज गति से यह लड़ाकू विमान उड़ सकेगा। रडार की पकड़ में न आने वाले ऐसे विमान के अगले 4-5 साल में उड़ान भरने की संभावना है। ऐसा होने के बाद वायुसेना की ताकत में जबरदस्त बढ़ोतरी हो जाएगी।
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लड़ाकू विमान तेजस (फाइल फोटो)
बताया गया कि स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया तेजस वायुसेना में शामिल हो चुका है और अपनी सेवाएं दे रहा है। अब इसी का और उन्नत संस्करण बनाया जा रहा है। 20 टन वजन वाले इस लड़ाकू विमान में अधिक वार हेड (युद्धक सामग्री) ले जाने की क्षमता होगी।
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लड़ाकू विमान तेजस (फाइल फोटो)
इसकी स्पीड भी मौजूदा तेजस से कहीं ज्यादा होगी। इसमें डबल इंजन मल्टीरोल और स्विंग रोल भी लगा होगा। जो इसकी मारक क्षमता में इजाफा करेगा। इसमें ऐसी तकनीक अपनाई जा रही है। जिससे पायलट उड़ान के दौरान भी चारों दिशाओं में देख सकेगा।
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लड़ाकू विमान तेजस (फाइल फोटो)
हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम लड़ाकू विमान के अगले चार से पांच साल में उड़ान भरने की तैयारी की गई है। इसका इंजन भी स्वदेशी तकनीक से विकसित किया जा रहा है। बताया गया कि स्वदेशी तकनीक से लड़ाकू विमान बनने के बाद इस दिशा में देश आत्मनिर्भर बन सकेगा।