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कपिलवस्तु महोत्सव: ओ मेरी पीठ में खंजर जरूर उतारेगा, मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा...
Thu, 19 Dec 2019 10:33 AM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, सिद्धार्थनगर
डिजिटल न्यूज डेस्क, सिद्धार्थनगर
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 19 Dec 2019 10:33 AM IST
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महोत्सव की तीसरी रात रही नामचीन शायरों और कवियों के नाम
- फोटो : अमर उजाला
महोत्सव की तीसरी रात काव्य के नाम रही। हास्य रचनाओं पर जहां कड़ाके की ठंड में लोगों ने ठहाके लगाकर माहौल को गर्म कर दिया। वहीं, शृंगार और प्रेम की कविताओं ने ऐसा जोर पकड़ा कि पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़हाट से गूंज उठा। पद्मश्री डॉ सुरेंद्र शर्मा ने हास्य व्यंग्य के जरिए राजनीतिक कटाक्ष, जाति व्यवस्था और देश की मौजूदा हालात पर अपनी बात रखी तो लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। बस यही लग रहा था कि मानों वक्त यू ही थम जाएं और मस्ती चलती रहे।
पद्मश्री डॉ सुरेंद्र शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार की रात कवि सम्मेलन मुशायरे की शुरुआत नैनीताल से आईं गौरी मिश्रा ने मां शारदा के वंदना से की। इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ तो देर रात तक चलता रहा। पद्मश्री डॉ सुरेन्द्र शर्मा ने जब मंच पर हंसने व गुदगुदाने का सिलसिला शुरू किया तो सभी के चेहरे पर मुस्कान छाई रही।
इस बीच जाति व्यवस्था, देश के मौजूदा हालात, मौजूदा दौर में परवरिश पर कटाक्ष कर सामाजिक ताने-बाने को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीत लिया। हंसी ठिठोली के बीच तंज कसते हुए कहा कि जब भाई-भाई का नहीं हो सकता, तो भारत का कैसा हो सकता है...। कहा कि आज की युवा पीढ़ी अब यह बताती है कि हम मां के साथ नहीं रह रहे, मां हमारे साथ रह रही है...।
इस बीच जाति व्यवस्था, देश के मौजूदा हालात, मौजूदा दौर में परवरिश पर कटाक्ष कर सामाजिक ताने-बाने को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीत लिया। हंसी ठिठोली के बीच तंज कसते हुए कहा कि जब भाई-भाई का नहीं हो सकता, तो भारत का कैसा हो सकता है...। कहा कि आज की युवा पीढ़ी अब यह बताती है कि हम मां के साथ नहीं रह रहे, मां हमारे साथ रह रही है...।
प्रसिद्ध शायर डॉ. वसीम बरेलवी
- फोटो : अमर उजाला
प्रसिद्ध शायर डॉ. वसीम बरेलवी ने ओ मेरी पीठ में खंजर जरूर उतारेगा, मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा... के साथ ही वसूलों पर जहां आंच आए टकराना जरूरी है, जो जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है... की प्रस्तुति ने लोगों का दिल जीत लिया।
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गजेंद्र सोलंकी बने संचालक
- फोटो : अमर उजाला
संचालन कर रहे गजेन्द्र सोलंकी ने वीर रस की कविताओं से युवाओं में जोश भर दिया। उन्होंने अपनी रचना भारत के परिंदों की जग में पहचान जिंदा है, रहे कहीं भी दिल में हिंदुस्तान जिंदा है... के जरिए यह बताने की कोशिश की देश कोई भी हो, हिन्दुस्तानी जहां है वहां हिन्दुस्तान जिंदा है।
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महोत्सव की तीसरी रात रही नामचीन शायरों और कवियों के नाम
- फोटो : अमर उजाला
बाराबंकी से आए हास्य कलाकार विकास बौखल ने मंच पर आते ही युवाओं में जोश भर दिया। इस महंगाई में कन्हैया यदि आए कहीं, सच कहता हूं रोटी दाल मार डालेगी... के साथ ही किसी खंजर को न तलवार से जोड़ा जाए, प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए... जैसी रचना के जरिए लोगों का दिल जीत लिया। लखनऊ से आए विख्यात मिश्रा ने देश भक्ति से जुड़े कई प्रसंग को सुनाकर पंडाल को गंभीर बना दिया। बस्ती से आए डॉ. आनंद कुमार ओझा ने मां की ममता को इंगित करते हुए रचना पढ़ी। बीबी कहती पाया क्या पाया, बच्चा कहता लाया, सिर्फ मां ही बेटा दिन में क्या खाया... की प्रस्तुुति ने मां की ममता को दिखाया।