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श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन साध्वी आस्था भारती ने सुनाए दक्ष यज्ञ समेत कई प्रसंग

Tue, 10 Dec 2019 12:03 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Tue, 10 Dec 2019 12:03 PM IST
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divya jyoti jagriti sansthan sadhvi aastha bharti bhagwat katha second day at champa park gorakhpur
सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
दिव्य जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को भागवत भक्ति की मंदाकिनी में हजारों श्रद्धालुओं ने गोते लगाए। सुप्रसिद्ध कथा वाचक साध्वी आस्था भारती ने व्यास पीठ से परीक्षित के अनशन व्रत और शुकदेव जी के आगमन, सती अग्नि प्रवेश और महादेव द्वारा दक्ष यज्ञ की पूर्ति से जुड़े प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।


इस दौरान व्यास पीठ से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। श्रोतागण .... ‘आओ इस धरती को बचा लें हम, एक अच्छी आदत को अपना लें हम’,‘भगवान सदा संग है अपने, एक वो ही सच्चा साथी है’ सरीखे भजनों पर झूमते नजर आए।
 
साध्वी ने कहा कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन की परेशानियों का उत्तम समाधान देती है और जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। परीक्षित कलयुग के प्रभाव के कारण ट्टष्टि से श्रापित हो जाते हैं। पश्चाताप में वह शुकदेव महाराज के पास जाते हैं। उनके चहरे पर उदासी देखकर शुकदेव महाराज उन्हें सवाल पूछने के लिए कहते हैं। उनके हर सवाल के जवाब में शुकदेव महाराज उन्हें प्रभु कृष्ण की लीलाएं सुनाते हैं। जिसे सुनकर परीक्षित के जीवन में बांके बिहारी की कृपा हुई। 
divya jyoti jagriti sansthan sadhvi aastha bharti bhagwat katha second day at champa park gorakhpur
सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
साध्वी ने कहा कि बांके बिहारी ने सदैव धर्म की स्थापना की है। उनका जीवन पांडवों के जीवन से जुड़ा हुआ है। पांडव देह हैं तो कृष्ण उनकी आत्मा है। एक समय ऐसा आया कि पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास भुगतना पड़ा। जैसे ही युधिष्ठिर राज्य को छोड़कर जाने लगे तो ब्राह्मणों ने उनका रास्ता रोक लिया और साथ ले चलने का आग्रह किया।

युधिष्ठिर ने उनसे कहा कि वनवास में जब मेरे भोजन की ही व्यवस्था नहीं होगी तो आप लोगों की कहां से करूंगा। तब धौम्य ऋषि ने उन्हें सूर्य देव की उपासना की सलाह दी। युधिष्ठिर की उपासना से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने उन्हें अक्षयपात्र दिया। जिसमें हर दिन भोजन तभी खत्म होता था, जब आखिर में द्रौपदी भोजन कर लेती थीं। इस प्रकार गुरु ने युधिष्ठिर का मार्गदर्शन कर विपदा से उबारा।

इससे पहले कथा की शुरूआत मुख्य यजमान व्यापारी कल्याण बोर्ड के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, तुलस्यान फार्मा के राजेश कुमार तुलस्यान, राम नक्षत्र सिंह ट्रेडर्स के महेंद्र सिंह, विजय अग्रवाल, अरुण कुमार मिश्रा, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी सुमेधानंद, स्वामी अर्जुनानंद, जगरनाथ बैठा, मिथलेश शर्मा, दिनेश चौरसिया, अच्छेलाल गुप्ता, मुन्ना यादव, प्रभा पांडेय आदि ने दीप जलाकर की।
divya jyoti jagriti sansthan sadhvi aastha bharti bhagwat katha second day at champa park gorakhpur
सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
व्यासपीठ से उठी पर्यावरण संरक्षण की अलख
साध्वी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन और रक्षण किया। बदले में प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। लेकिन विकास की अंधी दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के फलस्वरूप आज समस्त नदियां विनाश के कगार पर आ खड़ी हैं। इस बढ़ते प्राकृतिक असंतुलन को नियंत्रित करने और मानव और प्रकृति के बीच दोबारा सामंजस्य स्थापित करने के लिए संस्थान द्वारा ‘संरक्षण कार्यक्रम’ संचालित किया जा रहा है। इसके तहत स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान, झीलों और नदियों की सफाई, जल व ऊर्जा संरक्षण, तुलसी रोपण, एक अच्छी आदत समेत विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। संस्थान का यह मानना है कि जब मनुष्य आत्मिक रूप से जागृत हो जाता है तो प्रकृति का दोहन नहीं, उसका पूजन करता है।
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divya jyoti jagriti sansthan sadhvi aastha bharti bhagwat katha second day at champa park gorakhpur
सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
‘सेल्फी’ का मतलब खुद को जानना  
साध्वी ने मोबाइल से सेल्फी लेने के फेर में जान गंवाने वाले लोगों को नसीहत दी। कहा कि तरह तरह के मुंह बनाकर लोग फोटो लेते हैं। इससे अजीबोगरीब समस्याएं जन्म ले रही हैं। कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सेल्फी का मतलब मोबाइल पर महज फोटो लेने तक रह गया है। इसका मूल लक्ष्य खुद को जानने से है। अपने अंदर मौजूद आत्मतत्व को जानो। इसी अज्ञानता को दूर करने महापुरुष धरती पर आते हैं।
 
 ....और भर आईं साध्वी की आंखें
वनवास के दौरान पांडवों की कुटिया में दस हजार साधुुओं के साथ पहुंचे ऋषि दुर्वासा के प्रसंग को सुनाते हुए साध्वी की आंखे भर आईं। कहा कि जब अचानक ऋषि दुर्वासा वहां पहुंचे तो द्रौपदी भोजन कर चुकी थीं और अक्षयपात्र खाली था। पांडवों को साधुओं के अपमान का डर सता रहा था। ऐसे में द्रौपदी ने बांके बिहारी की आराधना की। उनके चमत्कार से सभी साधुओं के भोजन करने की इच्छा ही खत्म हो गई।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
:::: क्या बोले श्रद्धालु
 भागवत कथा में बांके बिहारी की लीलाओं को सुनकर बेहद प्रभावित हुई हूं। गुरुओं की महत्ता पर साध्वी जी की ओर से डाला गया प्रकाश आंखे खोलने वाला है।
राजकुमारी, सिविल लाइंस

भागवत कथा से पता चला कि संत महापुरुषों से भक्ति मांगनी चाहिए, मगर हम जाकर सांसरिक वस्तुओं की मांग करते हैं। इस सीख को अपने जीवन में अपनाऊंगा।
बुद्धि सागर पांडेय, उन्नवल

कथा के साथ-साथ समाजिक सरोकारों के बारे में भी जागरूकता फैलाई जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति साध्वी ने अलख जगाई है। दैनिक कार्यों के साथ इसे भी बढ़ावा देना का संकल्प लेकर जा रहा हूं।
विध्यांचल, जगतबेला

साध्वी की ओजस्वी वाणी कथा खत्म होने के बाद भी कानों में गूंज रही है। परीक्षित और शुकदेव महाराज के प्रसंग को सुनकर अच्छा लगा।
सुशीला, रसूलपुर
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