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चित्रकूट जेल गैंगवार: 15 हजार में कराई जाती थी वीडियो कॉल, गोलीकांड से पहले रात में चेक किए गए थे सीसीटीवी कैमरे
Mon, 17 May 2021 11:12 AM IST
शिखा पांडेय
सुधीर अग्रवाल, अमर उजाला, चित्रकूट
सुधीर अग्रवाल, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 17 May 2021 11:12 AM IST
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मुकीम, अंशू और मेराज की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट जिला जेल में बाहरी जिले से आए बंदियों को 15 हजार रुपये महीना देने पर मोबाइल से वीडियो काल की भी सुविधा मुहैया कराई जाती थी। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखने के बावजूद अंदर काफी कुछ चलता रहता था। अफसरों के दौरे के दौरान सब कुछ सामान्य दिखाने की फटाफट तैयारी कर ली जाती थी और अफसरों के जाते ही फिर जेल में दबंग व माफिया बंदियों की तूती बोलने लगती थी। जेल सूत्रों के अनुसार, शार्प शूटर अंशू दीक्षित ने सुल्तानपुर और रायबरेली की जेल में जो कुछ किया था, उसी तर्ज पर यहां भी पैठ बना ली थी। उसे फोन करने से कोई नहीं रोक सकता था। उधर, मेराज अली बेहद शांत रहता था, लेकिन उसका भी जेल में दबदबा था। शुक्रवार को घटना के पहले गुरुवार को जेल परिसर में देर शाम अंधेरा होने के बाद जेल के अफसर बैरक की ओर आए और सभी सीसीटीवी कैमरे चेक कराए थे।। साथ ही कुछ बंदियों की तलाशी भी ली गई थी।
घटना के बाद छावनी बनी चित्रकूट जेल
- फोटो : amar ujala
इसे लेकर बंदियों ने शक जताया था कि आखिर रात को चेकिंग का क्या मतलब है, पहले तो ऐसा नहीं हुआ। अब ये सवाल उठ रहे हैं कि जब दो माह से कैमरे खराब थे और सबको पता भी था तो 13 मई की रात को जांच क्यों कराई गई। बंदियों की रात में तलाशी लेने का भी मतलब समझ में नहीं आ रहा।
जेल के शस्त्रागार के बाहर तैनात फोर्स
- फोटो : amar ujala
आशंका जताई जा रही कि कहीं इसी बीच अंशू को पिस्टल तो नहीं पहुंचा दी गई। इसके दूसरे ही दिन सुबह गैंगवार में तीन खूंखार अपराधियों की मौत हो गई। वारदात के बाद जेल परिसर में कुछ बंदियों ने अफसरों को बताया था कि 15 हजार रुपये महीना देने पर वीडियो काल कराकर परिजनों व परिचितों से बातचीत कराई जाती है।
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जांच कर निकलते अधिकारी
- फोटो : amar ujala
पांच हजार रुपये महीना देने वालों को छोटे मोबाइल से सिर्फ बातचीत कराई जाती है। उधर, नए जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने कहा कि सब जांच का विषय है, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। जांच रिपोर्ट के बाद ही सब सामने आएगा। कहा कि ऐसे तो कोई भी आरोप लगा सकता है।
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गेट पर तैनात फोर्स
- फोटो : amar ujala
अंशू का जेल में था काफी दबदबा
शार्प शूटर अंशू दीक्षित का जेल में काफी दबदबा था। कई बार उसकी जेल के कुछ अफसरों से तीखी नोकझोंक भी हुई। यहां तक कि मारपीट की नौबत भी आई थी। उसे फोन बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाता था। ज्यादातर वह पीसीओ से ही फोन करता था। घटना के दिन भी वह पीसीओ की ओर फोन करने की बात कहकर जाते समय वहां न जाकर मुकीम काला के बैरक के पास पहुंचा और गोलियां चला दी। इसके बाद लौटकर अपने बैरक में मेराज को भी उड़ा दिया था।
शार्प शूटर अंशू दीक्षित का जेल में काफी दबदबा था। कई बार उसकी जेल के कुछ अफसरों से तीखी नोकझोंक भी हुई। यहां तक कि मारपीट की नौबत भी आई थी। उसे फोन बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाता था। ज्यादातर वह पीसीओ से ही फोन करता था। घटना के दिन भी वह पीसीओ की ओर फोन करने की बात कहकर जाते समय वहां न जाकर मुकीम काला के बैरक के पास पहुंचा और गोलियां चला दी। इसके बाद लौटकर अपने बैरक में मेराज को भी उड़ा दिया था।