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चित्रकूट गोलीकांड: ताबड़तोड़ गोलियों से शुरू हुई ईद की सुबह, 90 मिनट में दो की हत्या, एक एनकाउंटर
Fri, 14 May 2021 06:43 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 14 May 2021 06:43 PM IST
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घटना के बाद छावनी बनी चित्रकूट जेल
- फोटो : amar ujala
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चित्रकूट जिला जेल रगौली में ईद के दिन सुबह लगभग आधे घंटे तक ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज से हड़कंप मच गया। जेल में पूर्वाचंल के शार्पशूटर अंशू दीक्षित ने पिस्टल से कुख्यात अपराधी मुकीम काला व मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली को गोलियों से भून डाला। इसके बाद कई अन्य बंदियों को बंधक बनाकर जेल से भागने की बात करता रहा लेकिन इसी बीच जिले की भारी पुलिस बल ने आकर पूरे परिसर को घेर लिया और अंदर हत्यारोपी अंशू को आत्मसमर्पण के लिए कहा। हत्यारोपी ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग झोंक दी। जिसमें कई जवान बाल बाल बचे। इसी बीच जवाबी फायरिंग में पुलिस ने अंशू को भी ढेर कर दिया।
जेल के शस्त्रागार के बाहर तैनात फोर्स
- फोटो : amar ujala
जेल के अंदर तीन अपराधी बंदियों की मौत से पूरे प्रदेश का अमला हिल गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जेल महानिदेशक से पूरी रिपोर्ट तलब की है। मौके पर चित्रकूटधाम के मंडलायुक्त, आईजी, चित्रकूट के डीएम, एसपी और उपमहानिरीक्षक कारागार प्रयागराज पीएन पांडेय पहुंचे और पूरी घटना की जेल अधीक्षक से जानकारी ली। पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की गई है।
जेल के गेट पर मौजूद एसपी अंकित मित्तल
- फोटो : amar ujala
शुक्रवार की सुबह लगभग दस बजे जिला जेल में परेड के बाद जैसे ही सभी बंदी अपने अपने बैरक में जाने लगे तभी वाराणसी निवासी मेराजुद्दीन उर्फ मेराज अली के साथ ही एक बैरक में बंद सीतापुर निवासी अंशू दीक्षित ने अपनी कमर में पिस्टल निकाली और मेराज पर दो फायर झोंक दिए। जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जबतक कोई कुछ समझ पाता तबतक अंशू तेजी से दूसरे बैरक की ओर बढ़ा और अंदर मौजूद सुल्तानपुर निवासी मुकीम काला पर भी फायर झोंक दिया। जिससे पूरे जेल में हडकंप मच गया। सभी कैदी अपने स्थान पर दुबक गये। कुछ तो दीवार की आड़ में चले गये।
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जांच कर निकलते अधिकारी
- फोटो : amar ujala
फायरिंग की आवाज सुनते ही जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी व जेल में मौजूद पुलिसकर्मी अंदर पहुंचे तो हत्यारोपी अंशू ने उनकी ओर भी पिस्टल तान दी। इस दौरान उसने चार बंदियों को पिस्टल की नोंक पर अपने आगे खड़ा कर लिया था और बोला कि किसी तरह उसे बाहर निकालो नहीं तो इन चारों को भी मार देगा। वायरलेस व मोबाइल के जरिए जिला प्रशासन को सूचना मिली तो डीएम शुभ्रांत कुमार शुक्ल व एसपी अंकित मित्तल भारी पुलिस फोर्स के साथ जेल पहुंचे। तबतक पूरा जेल परिसर छावनी में बदल चुका था।
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एनकाउंटर में मारा गया अंशुल दीक्षित
- फोटो : amar ujala
एसपी के नेतृत्व में लगभग सौ से अधिक पुलिसकर्मियों ने पिस्टल लहरा रहे हत्यारोपी अंशू को घेर लिया और उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा लेकिन वह नहीं माना। अपनी पोजिशन बदलकर उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसी बीच मौका पाते ही वहां मौजूद अन्य कैदियों ने किसी तरह दौड़कर बैरक में घुसकर अपनी जान बचाई। अब पुलिस टीम व हत्यारोपी आमने सामने थे। दुबारा जब अंशू ने गोली चलाई तो पुलिस टीम ने भी फायर झोंक दिया जिससे गोली अंशू के पेट व पैर के पास लगी और मौके पर ही ढेर हो गया।