Bijnor Murder Case: बिजनौर जनपद के धामपुर में बदमाशों ने श्री मनोकामना मंदिर के पुजारी बेगराम (68) को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला। घटना से गुस्साए लोगों ने हरिद्वार-काशीपुर हाईवे पर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे तक लगे जाम को पुलिस अधिकारियों ने 48 घंटे में घटना का खुलासा करने का आश्वासन देकर खुलवाया। घटना के खुलासे के लिए पुलिस की सात टीमें लगाई गई हैं।
शनिवार सुबह चार बजे मंदिर में रोजाना की तरह कुछ महिलाएं साफ-सफाई करने के लिए पहुंचीं तो उन्हें मंदिर का मुख्य गेट बंद मिला। गेट नहीं खुला तो महिलाएं दूसरी ओर से मंदिर में पहुंचीं और मंदिर परिसर में ही बने एक कमरे में सो रही पुजारी की पत्नी जावित्री को उठाया। ये मंदिर की ओर बढ़ीं तो बरामदे में पुजारी बेगराम सिंह का लहूलुहान शव पड़ा हुआ था। शव के पास ही खून से सना हुआ एक डंडा भी पड़ा मिला। सूचना पर आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। आक्रोशित लोगों ने खुलासे की मांग करते हुए जाम लगा दिया।
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मौके पर जांच करने पहुंचे अधिकारी।
- फोटो : amar ujala
20 साल से मंदिर की देखभाल कर रहे बेगराम
पुजारी बेगराम पिछले करीब 20 साल से मंदिर की देखभाल और पूजापाठ कर रहे थे। उनकी हत्या से कस्बावासियों में रोष व्याप्त है। हिंदू संगठनों ने घटना के खुलासे की मांग करते हुए पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे हैं। पुजारी के गुरु भाई कृपाल सिंह सैनी ने घटना के संबंध में तहरीर दी है।
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पूछताछ करती पुलिस।
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घटना की सूचना पर पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। विधायक अशोक राणा ने भी जल्द खुलासे की मांग अधिकारियों से की। डीएम उमेश मिश्रा, एसपी दिनेश सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। घटना के संबंध में जानकारी ली। दोनों अधिकारियों ने 48 घंटे के भीतर घटना का खुलासा करने का लोगों को भरोसा दिया है।
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जांच करती पुलिस।
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विहिप जिलाध्यक्ष अनिल कुमार गोयल के नेतृत्व में बजरंग और विहिप के कार्यकर्ताओं ने डीएम और एसपी को ज्ञापन सौंपा। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने भी ज्ञापन सौंप घटना का खुलासा करने की मांग की। इस दौरान मौके पर धर्मवीर सिंह, डॉ. एनपी सिंह, सुशील सैनी, आंचल चौहान, कामेश्वर राजपूत, नितिन प्रकाश, अंकुर जैन रहे।
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पूछताछ करती पुलिस।
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गृहस्थी के दायित्व पूरे करने के बाद बन गए थे पुजारी
शेरकोट के मंदिर में पुजारी बनकर रहने वाले बेगराम मूलरूप से नूरपुर के गांव पुरैना के रहने वाले थे। गांव वालों ने बताया पुजारी बेगराम का व्यवहार बहुत अच्छा था। जब वे गांव में आते थे सभी से मिलने के बाद ही लौटते थे। वे दो भाइयों में बड़े थे। जिनकी पांच संतान है। सभी का विवाह आदि सामाजिक दायित्व निभाने के बाद वह शेरकोट के इस मंदिर में आए थे। इस मंदिर की स्थापना भी उन्हीं ने कराई। बेगराम अपनी पत्नी के साथ मंदिर में रहते थे। बताया गया कि इससे पहले वह चांदपुर क्षेत्र के गांव बास्टा में एक मंदिर में भी पुजारी रहे थे।