बागपत जनपद में रटौल थाना क्षेत्र के लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर परिसर में अंकित प्रजापति और इसरार की हत्या के बाद आरोपी साधु नरेशनाथ की पुरानी गतिविधियां सामने आने लगी हैं। ग्रामीणों के अनुसार नरेशनाथ सट्टे के नंबर बताने और तंत्र क्रिया के नाम पर लोगों से रुपये लेने के साथ धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ा रहा था।
उसके पास दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों से लोग सट्टे के नंबर लेने आते थे। रकम को लेकर कई बार विवाद भी हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उसके तौर-तरीकों से परेशान होकर पहले नवादा गांव और बाद में सिंगौली तगा के डेरे से भी उसे भगाया गया था।
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बागपत डबल मर्डर
- फोटो : अमर उजाला
सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से बढ़ाया प्रभाव
सिंगौली तगा के ग्रामीण अंकुश और विकास के अनुसार नरेशनाथ दिसंबर 2025 में बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर आया था। वहां पहुंचने के बाद उसने सीसीटीवी कैमरे, वातानुकूलित यंत्र, बड़ी दूरदर्शन मशीन, कपड़े धोने की मशीन समेत कई सुविधाएं जुटा लीं।
उसके परिचितों का भी डेरे पर आना-जाना बढ़ गया। दिनभर बाहरी लोगों की आवाजाही और रात में महिलाओं के आने से ग्रामीणों को परेशानी होने लगी। आरोप है कि नरेशनाथ ने गांव के कई लोगों से तंत्र क्रिया के नाम पर रुपये लिए। रुपये वापस मांगने पर विवाद भी हुआ।
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बागपत डबल मर्डर
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ग्रामीणों के अनुसार नरेशनाथ सट्टे के नंबर भी बताता था। उसके पास दूर-दराज के राज्यों से लोग नंबर लेने पहुंचते थे। सट्टे की रकम को लेकर भी उसका लोगों से विवाद हुआ। यही कारण था कि वह गांव में धीरे-धीरे प्रभाव बढ़ाने के साथ विवादों में भी घिरता गया।
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बागपत में दो दोस्तों की हत्या
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गांव से चुनाव लड़ने की भी कर रहा था तैयारी
ग्रामीण विकास ने बताया कि नरेशनाथ मूल रूप से कहां का रहने वाला है, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। कुछ समय बाद एक जनप्रतिनिधि की मदद से उसने अपने पहचान पत्र में पता सिंगौली तगा का करा लिया था। इसके बाद वह गांव से चुनाव लड़ने की बात भी करने लगा था। ग्रामीणों से मिलकर चुनाव की तैयारी करने की चर्चा करता था।
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बागपत डबल मर्डर
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ग्रामीणों का आरोप है कि उसने लोगों का भरोसा जीतने के लिए अपनी पहचान को लेकर भी अलग-अलग बातें बताईं। सिंगौली तगा और लहचौड़ा गांव में एक विशेष जाति की आबादी अधिक होने के कारण उसने खुद को उसी जाति का बताकर लोगों का विश्वास हासिल करने की कोशिश की। बाद में अपनी जाति को लेकर अलग-अलग जानकारी देने लगा। ग्रामीणों के मुताबिक वह खुद को अविवाहित बताता था, जबकि उसकी पत्नी और बेटा भी उसके आसपास ही रहते थे।