गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के संगम के समीप यमुना तीरे 29 फरवरी से होने वाली मुरारी बापू की रामकथा में आने वाली राम भक्तों की भीड़ की सुरक्षा संरक्षा से लेकर खाने-पीने और रहने तक की व्यवस्था आयोजक मंडल की तरफ से होगी। इसके लिए किसी भक्त से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
प्रयागराज में संगम तीरे एक साथ 30 हजार भक्त सुनेंगे मोरारी बापू की रामकथा
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करीब एक लाख स्क्वायर फीट के कथा पंडाल में 25 से 30 हजार भक्त एक साथ बैठकर कथा सुन सकेंगे। संगम के समीप एक दर्जन से ज्यादा खंडों में बसाए गए इस रामकथा स्थल में अक्षयवट की मनमोहक छटा के मध्य राजस्थान की कलाकृति, गुजरात का प्रभु प्रसाद और विदेशी भक्तों की भीड़ का विहंगम दृष्य एक साथ देखने को मिलेगा।
संत कृपा सनातन संस्थान, राजस्थान की ओर से आयोजित वीवीआईपी कल्चर की रामकथा में मोरारी बापू को सुनने के लिए देश-विदेश से भक्त आएंगे। इसके लिए कथा स्थल पर दो हजार लोगों के ठहरने की वातानुकूलित व्यवस्था की गई है। इसके अलावा शहर के विभिन्न होटलों में भी पांच हजार लोगों के रुकने का इंतजाम आयोजक मंडल की तरफ से पूर्णतया नि:शुल्क किया गया है।
26 फरवरी को संस्थान प्रमुख मदन पालीवाल और प्रकाश पुरोहित संतोषदास महराज सतुआ बाबा के साथ अरैल में निर्माणाधीन कथास्थल पर हो रही तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने वहां काम करने वाले कारीगरों से लेकर रसोईयों तक से बातचीत की और उनके काम की सराहना की। भव्यता, शिष्टता और दिव्यता के प्रतीक बन चुके मोरारी बापू के कथास्थल के अंदर चिकित्सा व्यवस्था से लेकर अग्रिशमन की वाहन, यातायात व्यवस्था, एंबूलेंस समेत वो तमाम इंतजाम किए गए हैं जो रोजाना के साथ-साथ आकस्मिक जरूरतों के अनुसार उपयोग में लाए जाएंगे।
भगवान राम को जिस तरह से केवट ने नाव से गंगा पार कराया था, कुछ उसी तर्ज पर यहां प्रतिदिन मोरारी बापू समेत अन्य संतों और उनके भक्तों को गंगा-यमुना पार कराने के लिए करीब 50 नावों की व्यवस्था की गई है। जिसकी प्रमुख वजह सडक़ मार्ग का उपयोग कम से कम करना है। शहर की यातायात व्यवस्था को देखते हुए संगम क्षेत्र या फिर शहरी क्षेत्र में जाने के लिए सडक़ का उपयोग कम से कम करने की तैयारी है। इसके लिए अरैल से संगम जाने हेतु आयोजक मंडल ने 50 नावों की व्यवस्था की है। इनके नाविक 24 घंटे वहां ड्यूटी अनुसार उपलब्ध रहेंगे और उस पार जाने और आने वालों को ले जाएंगे। इन नावों को राम रंग में रंग दिया गया है और राम नाम लिख दिया गया है।