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फैक्ट्रियों में काम बंद, मकान मालिकों ने भी निकाला, मुसीबत बयां कर फफक कर रो पड़े दिल्ली से लौटे मजदूर

Sun, 29 Mar 2020 11:09 PM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 29 Mar 2020 11:09 PM IST
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Work stopped in factories, landlords also pulled out, laborers returned from Delhi crying because of trouble
प्रयागराज में दिल्ली और अन्य स्थानो से लौट रहे मजदूर। - फोटो : prayagraj

दिल्ली से चलकर रविवार की सुबह सिविल लाइंस बस स्टेशन पर उतरे मिर्जापुर के हलिया स्थित बसुहरा गांव के राममूरत समेत 19 मजदूर अपनी व्यथा बताकर फफक पड़े। कारखाना बंद होने के बाद मकान मालिक ने भी कोरोना संक्रमण के डर से घर से निकाल दिया।



चार दिन से वह दिल्ली की सड़कों पर वाहन की तलाश में भटक रहे थे। बस स्टेशन के सामने कुछ लोगों ने पूड़ी-सब्जी के पैकेट दिए तो जान में जान आई। इस लॉक डाउन में अकेले राममूरत और उनके साथी ही नहीं, उनके जैसे हजारों लोग घर पहुंचने के लिए वक्त से जूझ रहे हैं। वाहनों के इंतजार में कोई घर के बाहर भूखा पड़ा है, तो कोई सैकड़ों किमी पैदल चलने के लिए मजबूर है।

Work stopped in factories, landlords also pulled out, laborers returned from Delhi crying because of trouble
प्रयागराज में सिविल लाइंस बस अड्डे पर दिल्ली से लौटे मजदूरों को भोजन सामग्री देते समाजसेवी संगठन के सदस्य। - फोटो : prayagraj

हलिया केवसुहरा निवासी ज्वाला, गुरु प्रसाद बिंद, रामकरन ने बताया कि वह एक जूता फैक्ट्री में काम कर रहे थे। लॉक डाउन में काम बंद होने केबाद मजदूरों को वापस कर दिया गया। किराये के कमरे भी खाली करा लिए गए। ऐसे में दिल्ली छोड़ने के अलावा उनकेपास कोई चार नहीं बचा था। ज्वाला ने बताया कि प्रयागराज तक आने के लिए परिवहन निगम की बस के कंडक्टर ने सबी 19 साथियों से छह हजार रुपये वसूले।

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प्रयागराज में सिविल लाइंस बस अड्डे पर दिल्ली से लौटे मजदूरों को भोजन सामग्री देते समाजसेवी संगठन के सदस्य। - फोटो : prayagraj
घंटों बस स्टेशन पर इंतजार करने के बाद जब कोई वाहन नहीं मिला तब वह मिर्जापुर के लिए पैदल रवाना हो गए। इसी तरह सिरसा के रहने वाले महेंद्र सिंह दिल्ली में इलेक्ट्रिशियन हैं। काम ठप होने के बाद वह भी सात सौ रुपये किराया देकर बस से यहां पहुंचे। कानपुर के अग्रवाल ट्रांसपोर्ट में काम करने वाले रीवा के राजेंद्र प्रसाद गौतम भी सुबह एक निजी वाहन की मदद से यहां पहुंचे। वह भी तीन दिन से बिना खाए भटक रहे थे।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
उन्होंने बताया कि फिलहाल घर जाने की चिंता है। कोई वाहन न मिलने पर वह भी पैदल ही रवाना हुए। दिल्ली में एक इलेक्ट्रिक कंपनी में सेफ्टी आफीसर के पद पर तैनात रहे शनि कुमार को भी बस से उतरने के बाद दो दिन बाद बस स्टेशन के सामने खाना मिला तो उन्होंने राहत की सांस ली। इसी तरह कानपुर, दिल्ली व अन्य शहरों में काम धंधा बंद होने के बाद सिविल लाइंस बस स्टेशन पर उतर रहे कुछ लोग बसों से तो कुछ पैदल ही अपने घरों के लिए बढ़ रहे हैं।
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