सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में मंसूर अली पार्क में महिलाओं का धरना सोमवार को भी जारी रहा। 23वें दिन भी अलग-अलग स्थानों से महिलाओं ने जुलूस निकाला। जुलूस और धरना में देशभक्ति के गीत भी लगतार गूंजते रहे।
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- फोटो : प्रयागराज
बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर जनक पांडेय धरने में शामिल हुए। उन्होंने सीएए, एनआरसी आदि को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सीएसआईआर के मुख्य वैज्ञानिक रहे सामाजिक कार्यकर्ता एवं गीतकार गौहर रजा भी धरने में शामिल हुए। उन्होंने धर्म आधारित किसी भी कानून का विरोध किया। उनका कहना था कि सीएए में अन्य पंथ के साथ मुस्लिम शामिल किए जाते तब भी वह इसका विरोध करते। गौहर रजा का कहना था कि संविधान पंथ निरपेक्षता की बात करता है। इसलिए हमारे देश में लोकतंत्र कायम रहा।
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इसके विपरीत हमारे पड़ोसी देशों में यह पंथ निरपेक्षता नहीं है। इसीलिए वहां लोकतंत्र खतरे में है। देश और नागरिकता में पंथ को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से धैर्य के साथ आंदोलन जारी रखने की अपील की। कहा कि सम्मान जल्द मिलेगा। इरशाद उल्ला, सै.मो.अस्करी, सबीहा मोहानी, सायरा, अहमद, जीशान रफत, नेहा यादव, शोएब अंसारी, सै.मो.साहब, अकीलुर्रहमान आदि धरने में शामिल हुए और संबोधित किया।
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सीएए के विरोध में महिलाओं ने जगह-जगह से जुलूस निकाला और धरने में शामिल हुईं। अटाला से लगातार चौथे दिन निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं। महिलाएं हाथ में तिरंगा लिए हुए थीं। इनके अलावा बहादुरगंज, करेली, घंटाघर सब्जी मंडी आदि स्थानों से महिलाओं ने जुलूस निकाला।