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बिन विवेक कर्म-विश्वास और संबंध तीनों व्यर्थ :मोरारी बापू

Fri, 06 Mar 2020 12:53 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 06 Mar 2020 12:53 AM IST
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Vivek Karma-Faith and Relation all three in vain: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

देश-दुनिया के कई हिस्सों से संगम पर उमड़े मानस प्रेमियों के बीच संत मोरारी बापू ने बृहस्पतिवार को जीवन से जुड़े तीन सूत्रों कर्म, विश्वास और संबंध की विवेचना की। उन्होंने कहा कि जीवन के इन तीनों पहलुओं पर बिना विवेक केनहीं चलना चाहिए। यह संसार एक प्राणी संग्रहालय की तरह है। इसमें विवेक विरोधी कोई कार्य नहीं करना चाहिए। विवेक सिर्फ सत्संग से ही आ सकता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वह जीवन में बदलाव के लिए सही दिशा में बढ़ने के लिए सत्संग जरूर करें।

Vivek Karma-Faith and Relation all three in vain: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित कथा के पांचवें दिन मोरारी बापू ने युवाओं को सत्संग करने का संदेश दिया। बिनु सत्संग विवेक न होई/ रामकृपा बिनु सुललभ न सोई... चौपाई की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि लोग नई पीढ़ी के बीच सत्संग को पाखंड या अंध विश्वास के रूप में बताकर संकीर्ण बना देते हैं, जबकि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। युवा सत्संग को संकीर्ण न बनाएं।

Vivek Karma-Faith and Relation all three in vain: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

मन, मंदिर, मूर्ति सब में सत्संग है। सही दिशा सत्संग से ही मिल सकती है। मोरारी बापू ने सिद्धांत और स्वभाव में फर्क बताया।  उन्होंने कहा कि अपना स्वभाव खुद को अच्छा लगना चाहिए। खुद को अपने स्वभाव से तसल्ली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी सिद्धांत अकाट्य नहीं होता। एक सिद्धांत को दूसरे सिद्धांत से काटा जा सकता है, लेकिन स्वभाव हमेशा अकाट्य होता है।

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Vivek Karma-Faith and Relation all three in vain: Morari Bapu
prayagraj news - फोटो : prayagraj

इसलिए स्वभाव हमेशा ठीक रखना चाहिए। उन्होंने अभावग्रस्त जीवन में आगे बढ़ने और जीने की भी सीख दी। बताया कि अभावों के बीच आने वाली परिस्थितियों को स्वीकार करना चाहिए। फिर तो रास्ते बन जाते हैं। मोरारी बापू का कहना था कि देखने के लिए आंखें होनी चाहिए। आंखें दिखाने के लिए नहीं निरखने के लिए होती हैं। आंखें हमें हमेशा दर्शन का बोध कराती हैं। इस दौरान कथा के संयोजक मिराज ग्रुप के एमडी मदन पालीवाल,रवींद्र जोशी, रूपेश व्यास, विष्णु कांत व्यास, मंत्रराज पालीवाल, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा समेत तमाम लोगों ने व्यासपीठ की आरती की। 

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मोरारी बापू की व्यास पीठ पर कल वंचित परिवारों की बेटियां लेंगी सात फेरे, 25 जोड़ों का पंजीयन

मानस अक्षयवट’ रामकथा के तहत  संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से संत मोरारी बापू की व्यास पीठ पर शनिवार को सामूहिक विवाह की भव्य तैयारियां आरंभ हो गई हैं। बृहस्पतिवार को रामकथा कार्यालय में विवाह पंजीयन के लिए भीड़ लगी रही। देर शाम तक 25 वर-वधुओं का पंजीयन किया गया था। कथा प्रबंधन के मुताबिक मोरारी बापू ने प्रयागराज में पांच सौ जोड़ों के सामूहिक विवाह की इच्छा जताई है। इसे देखते हुए बारातियों के सत्कार और दुल्हनों के उपहार की व्यवस्था की जा रही है।  

पंजीकृत जोड़े सात मार्च को मोरारी बापू की व्यास पीठ के समक्ष सात फेरे लेते हुए एक दूसरे को वरमाला पहनाएंगे। सात ही रामचरितमानस पोथी को साक्षी मानते हुए अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत करेंगे। सभी जोड़ों के लिए पोशाक, उपहार, वरमाला समेत अन्य इंतजाम संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से किए जाएंगे।
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