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प्रतापगढ़ हादसा: बहनों की डोली उठने से पहले दुनिया से विदा हो गया बबलू, नियति ने घोंट दिया सुनीता के अरमानों...
Sun, 22 Nov 2020 08:37 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 22 Nov 2020 08:37 AM IST
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road accident
- फोटो : अमर उजाला
प्रतापगढ़ के कुंडा में हादसे का शिकार हुई बरातियों से भरी बोलेरो में जिरगापुर गांव का अभिमन्यु (28) भी सवार था। उसे अगले दिन शुक्रवार की सुबह गुड़गांव जाना था, लेकिन इससे पहले रात में ही उस पर मौत ने झपट्टा मार दिया। वह गुड़गांव में नौकरी करता था। परदेस जाने की तैयारियों के चलते गुरुवार को वह बरात में नहीं जा रहा था, लेकिन होनी को आखिर कौन टाल सकता है।
एक साथ 14 लाशें
- फोटो : अमर उजाला
तीन साल पहले उसकी शादी सुनीता के साथ हुई थी। दोनों ने साथ मिलकर घर सजाने का सपना बुना था, लेकिन एक ही झटके में नियति ने सुनीता के अरमानों का गला घोंट दिया। दोनों के अभी बच्चे भी नहीं हैं। घर को संवारने के लिए रुपये जुटाने के चक्कर में अभिमन्यु बहुत मेहनत से गुड़गांव में काम कर रहा था।
एक साथ 14 लाशें
- फोटो : अमर उजाला
उसकी मौत के बाद पत्नी सुनीता का रो-रो कर बुरा हाल था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अभिमन्यु अब इस दुनिया में नहीं रहा। अभिमन्यु का एक छोटा भाई अजीत है। दो छोटी बहनों में कल्पना की शादी हो चुकी है, जबकि 19 साल की अल्पना का अभी विवाह होना है। पिता रमेश चंद्र यादव पीआरडी के जवान हैं।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बेटे के कमाने से उनकी मुश्किलें धीरे-धीरे कम हो रही थीं। उन्हें यह भरोसा था कि अब घर की परेशानियां दूर होने के साथ ही छोटी बेटी अल्पना का विवाह भी आसानी से हो जाएगा। उन्होंने बेटी के लिए लड़का भी ढूंढना शुरू कर दिया था। वह अभिमन्यु के नौकरी करने से काफी खुश थे।
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अस्पताल में शव
- फोटो : अमर उजाला
कच्ची घर-गृहस्थी को संभालने में जुटे अभिमन्यु की मौत के बाद अब फिर से पिता के कंधों पर ही सारी जिम्मेदारी आ गई है। उसके अचानक इस तरह चले जाने से सुनीता की तो दुनिया ही उजड़ गई है। अभी शादी को तीन साल ही हुए थे। बच्चे भी नहीं हैं। आखिर वह किसके भरोसे आगे की जिंदगी बिताएगी।