कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और संघटक महाविद्यालय सोमवार से खुल गए। पहले दिन ज्यादातर शिक्षक विश्वविद्यालय और कॉलेज पहुंचा। हालांकि इविवि के दो शिक्षकों के कोरोना संक्रमित पाए जाने से विश्वविद्यालय आए शिक्षकों के बीच भय का माहौल दिखा और दिन भर इसी बात को लेकर चर्चा होती रही। इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) ने कुलपति को पत्र भेजकर गर्मी की छुट्टी बढ़ाए जाने की मांग की है।
कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच खुला इलाहाबाद विश्वविद्यालय
इविवि एवं कॉलेज में 21 जून तक गर्मी की छुट्टी घोषित की गई थी। सोमवार से विश्वविद्यालय एवं कॉलेज खुलने पर शिक्षकों को बुलाया गया। विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी गेट से शिक्षकों एवं अफसरों को प्रवेश दिया गया। प्रवेश से पहले शिक्षकों, अफसरों और कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। विश्वविद्यालय के बाकी गेट बंद थे।
इस बीच कुछ छात्र एवं शोधार्थी भी विश्वविद्यालय पहुंचे लेकिन उन्हें गेट से ही वापस कर दिया गया। सिर्फ उन्हीं छात्रों एवं शोधार्थियों को प्रवेश की अनुमति दी गई, जिन्हें किसी शिक्षक या विभागाध्यक्ष ने बुलाया था। कक्षाएं बंद होने के कारण सभी शिक्षक दिनभर खाली बैठे रहे। विभागों में हैंड सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था की गई थी।
उधर, ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे, महामंत्री प्रो. शिवमोहन प्रसाद और वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी की ओर से कुलपति को पत्र भेजकर मांग की गई कि हर साल की तरह इस बार भी जुलाई के दूसरे सप्ताह से विश्वविद्यालय खोलने की घोषण करें और कार्यालय आदेश जारी करने के लिए रजिस्ट्रार को निर्देश दें। पत्र के जरिये कुलपति को बताया गया है कि उनके आदेश पर सभी शिक्षक अपने विभागों में पहुंच गए हैं लेकिन वे कोरोना महामारी सशंकित, सहमे हुए और भयभीत नजर आ रहे हैं।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों में बड़ी संख्या वरिष्ठ नागरिकों की है और युवा पीढ़ी के शिक्षकों के भी छोटे बच्चे है, जिन्हें सुरक्षित रखना हम सबका दायित्व है। पिछले दो दिनों से अनेक शिक्षकों ने ऑटा पदाधिकारियों से फोन पर संपर्क कर यही कह रहे हैं कि अभी विश्वविद्यालय जाना सुरक्षित नहीं है।