Prayagraj Magh Mela 2021 : संगम की रेती पर बसने लगा मेला, देवी-देवताओं के लिबास में रंगत बिखेर रहे बच्चे
प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं को भूमि आवंटन के बाद माघ मेला बसाने का काम आरंभ हो गया है। तरह-तरह के वेश में बाबा मेला क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं। बच्चे भी देवी-देवताओं के आकर्षक लिबास में मेला क्षेत्र भ्रमण कर रहे हैं। इससे रंगत दिखने लगी है। दंडीबाड़ा में दंडी स्वामी नगर बसाने के लिए शिविर लगाने का काम मंगलवार को शुरू हो गया। लेकिन, अभी तक सड़क और पेयजल की सुविधाओं के अभाव की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ओल्डजीटी, गंगोली शिवाला और त्रिवेणी पुलों को जोड़े जाने के बाद पैदल आवागमन तो शुरू हो गया है, लेकिन अभी काम बाकी है। सड़कों पर बालू डाल कर छोड़ दिया गया है। चकर्ड प्लेट बिछाने का काम बड़े हिस्से में बाकी रह गया है। सबसे अधिक दिक्कत पेयजल को लेकर हो रही है। जल निगम की ओर से पेयजल की पाइप लाइनें अभी नहीं डाली जा सकी हैं। ऐसे में शिविर लगाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। दंडीबाड़ा के अलावा अन्य सेक्टरों में पानी की आपूर्ति के लिए फिलहाल टैंकर लगाने पड़े हैं।
- पंडाल-टेंट सुविधाओं में कटौती, संत नाराज
माघ मेले में यह पहला मौका है जब मंच और पंडाल सुविधाएं संतों-भक्तों को नहीं दी जा रही हैं। कोविड-19 के संक्रमण की वजह से पंडाल और मंच लगाने की मनाही कर दी गई है। ऐसे में संतों की चिंता है कि उनके भक्त आएंगे तो बैठेंगे कहां। कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण की वजह से मेले में किसी जगह भीड़ न लगने देने की गाइड लाइन की वजह से इस बार मंच और पंडाल की सुविधा रोक दी गई है। इससे संतों में नाराजगी है।