इस बार देवी प्रतिमाओं के विसर्जन केलिए अंदावा के तालाब में व्यवस्था की र्गई थी। हालांकि विसर्जन स्थल दूर करने पर दुर्गा पूजा कमेटियों ने रोष भी जताया। इस बीच दशमी के दिन मंगलवार होने के कारण बड़ी संख्या में कमेटियों ने विसर्जन कार्यक्रम स्थगित करते हुए बुधवार को देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया।
आरंभ में पूजा अर्चना के बाद देवी प्रतिमाओं का दर्पण विसर्जन किया गया। फिर जयकारों केबीच प्रतिमाओं को गाड़ियों पर रखा गया। प्रतिमा के साथ कमेटी और मोहल्ले से जुड़े भक्तों का रेला भी साथ चला। पूरे रास्ते महिलाओं, बेटियों ने नृत्य भी किया। श्रद्धालुओं ने एक दूसरे के गाल पर अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।
प्रतिमाओं के विदा होने के बाद पूजा पंडाल बेरौनक हो गए थे लेकिन वापसी पर फिर पूजा पंडाल में सभी के जुटने से रौनक आ गई। घाट से कलश में भरकर लाया गया ‘शांतिजल’ पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं पर छिड़का गया। फिर इसी में से थोड़ा-थोड़ा जल लोग घरों में भी ले गए, जहां उसे पूजा स्थल और कमरों में भी छिड़कते हुए देवी से पूरे वर्ष के मंगल के लिए कामना की गई। पुरखों को भी प्रणाम किया गया।
पंडाल में मिलन समारोह के दौरान छोटों ने बड़ों के पांव छूकर आशीष लिया तो बड़ों ने भी अपने से छोटों को आशीर्वाद दिया। सुहागिनों ने मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया, फिर एक दूसरे को सिंदूर लगाकर तथा ‘शुभो विजयो’ कहकर पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। इस खुशी में मन का मैल भी घुल गया। जाने-अनजाने हुई भूल के लिए लोगों ने एक दूसरे से क्षमा मांगी और बैरभाव भुलाने का संकल्प लिया। अनबन की गांठें खुदबखुद खुल गईं। पंडाल से विदा होते समय लोगों ने एक-दूसरे को अपने घर आने का न्योता भी दिया।
हनुमत निकेतन कॉलोनी शाहा पीपल गांव की प्रतिमा भी विसर्जित की गई। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश पत्र वितरक सेवा समिति के महामंत्री भोला अवस्थी सहित डॉ.नीरज पांडेय, जितेंद्र त्रिपाठी, सुनील श्रीवास्तव, सुमित शुक्ला, राहुल श्रीवास्तव, संजीव रंजन श्रीवास्तव, हरिओम, श्यामलाल, शिवम, अमित शुक्ला, महेंद्र यादव, लकी आदि शामिल थे।