होली के ठीक एक दिन पहले प्रयागराज के तमाम स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनें ठसाठस रहीं। दिल्ली रूट की ट्रेनों में भीड़ कुछ ज्यादा ही आई। प्रयागराज एक्सप्रेस, रीवा एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस, नई दिल्ली-मंडुवाडीह एक्सप्रेस आदि ट्रेनों के स्लीपर कोच में ढेरों यात्री ऐसे रहे जिनके टिकट कंफर्म नहीं थे। मजबूरी में यह यात्री स्लीपर, थर्ड एसी कोच की फर्श पर बैठकर प्रयागराज तक आए। उधर, रोडवेज की बसों में भी यात्रियों की भीड़ खूब गई। हालांकि शाम होते-होते सिविल लाइंस बस स्टेशन पर भीड़ छंट गई।
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- फोटो : prayagraj
प्रयागराज जंक्शन पर सोमवार सुबह से ही विभिन्न स्थानों की ओर जाने वाले यात्रियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। एक ओर जहां दिल्ली से आने वाली ट्रेनें यात्रियों से ठसाठस यहां पहुंची तो वहीं प्रयागराज से कानपुर और बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में काफी यात्री खड़े-खड़े ही गए। हालांकि शाम होते-होते जंक्शन आने वाली ट्रेनों से ही यहां यात्री उतरते दिखाई दिए, जबकि यहां से ट्रेनों में चढ़ने वाले यात्रियों की संख्या कम रही। यही स्थिति रामबाग, छिवकी, प्रयागराज संगम एवं प्रयाग जंक्शन की भी रही।
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उधर रोडवेज के सिविल लाइंस बस स्टेशन पर भी दिन भर यात्रियों का मजमा लगा रहा। यहां क्षेत्रीय प्रबंधक टीकेएस बिसेन भी बस स्टेशन पर दोपहर तक रहे। उन्होंने बताया कि भीड़ होने की वजह से दोपहर तक वाराणसी और गोरखपुर रूट पर 45 अतिरिक्त बसों का संचालन किया गया। लखनऊ, फैजाबाद रूट पर 30 अतिरिक्त बसें लगाई गई। हालांकि शाम तक बस स्टेशन पर भीड़ काफी कम हो गई।
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जो आ गए उन्हें अब है लौटने की टेंशन
अपनों संग होली मनाने के लिए तमाम लोग शहर तो पहुंच गए, लेकिन उनके सामने अब लौटने की टेंशन हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि होली के बाद अगले एक सप्ताह तक किसी भी ट्रेन में जगह नहीं है। प्रयागराज से दिल्ली, मुंबई, मेरठ, चेन्नई, हावड़ा आदि रूटों की तरफ जाने वाली ट्रेनों में लंबी प्रतीक्षा सूची हो गई है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति दिल्ली रूट की ट्रेनों की है। इस रूट की तमाम ट्रेनों के स्लीपर एवं थर्ड एसी में नो रूम की स्थिति हो गई है। ऐसे में यात्रियों के पास अब रेलवे की तत्काल सेवा का ही विकल्प बचा है।