माघ मेला क्षेत्र में सेना बृहस्पतिवार को एक्शन मोड में आ गई। इस दौरान सेना ने बांध और उसके आसपास के इलाकों में अभियान चलाकर 300 से ज्यादा अवैध कब्जे को हटाया। छावनी परिषद और रक्षा संपदा विभाग के अफसरों की मौजूदगी में चले इस अभियान के दौरान सेना ने वहां तमाम दुकानदारों की अस्थायी दुकानें गिरा दी। इसके अलावा वर्षों से वहां बसे तीर्थपुरोहितों के तख्त, बस्ते आदि को भी सेना ने हटा दिया। सेना के तेवर को देख कर तीर्थ पुरोहित भी ज्यादा विरोध नहीं कर सके।
प्रयागराजः मेला क्षेत्र में सेना ने हटाए 300 से ज्यादा अवैध कब्जे, मचा हड़कंप
पिछले कुछ दिनों से सेना द्वारा मेला क्षेत्र में अवैध कब्जा हटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। इस बीच वहां तमाम दुकानदारों आदि को बताया गया था कि वह अपना कब्जा खुद ही हटा दें। पिछले तीन दिनों के दौरान सेना के साथ छावनी परिषद और रक्षा संपदा विभाग के अफसरों ने सर्वे भी किया। इस बीच छावनी परिषद की ओर से बताया गया कि संबंधित क्षेत्र में उसकी कुल 24 दुकानें ही हैं। बृहस्पतिवार को तीन जेसीबी के साथ सेना के जवान संगम क्षेत्र पहुंचे। इसके बाद वहां एक-एक करके अवैध कब्जों को हटाया जाने लगा।
बांध के पास दर्जनों अस्थायी एवं पक्की दुकानें थीं, उन सभी को मिनटों में ही ध्वस्त कर दिया। इस आपाधापी में वहां दुकानदारों में हड़कंप मच गया। प्रसाद, लड्डू आदि सामान लेकर तमाम दुकानदार इधर-उधर भागने लगे। बहुत से तीर्थपुरोहितों के तख्त आदि भी कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दिए गए। इसे लेकर तीर्थपुरोहितों में खासी नाराजगी रही। तमाम तीर्थपुरोहितों एवं दुकानदारों का कहना था कि वह गंगा मां की गोद में वर्षों से यहां काबिज हैं। इस तरह की कार्रवाई यहां पहले कभी नहीं की गई। तीर्थपुरोहित रामकृष्ण तिवारी, माधवानंद शर्मा आदि ने कहा कि तमाम तीर्थ पुरोहितों के बही खाते भी सेना की इस कार्रवाई में नष्ट हो गए। इन खातों में उनके यजमानों की वंशावली आदि थी।
उधर कार्रवाई के बाद संगम क्षेत्र में रखे अधिकांश तख्त आदि गायब हो गए। मेला क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के बाद सैन्य अफसरों ने भी चुप्पी साध ली। मेला क्षेत्र में हुई कार्रवाई को लेकर रक्षा संपदा विभाग के डीईओ विनीत कुमार का पक्ष लेने का प्रयास किया गया तो किसी ने फोन तक रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। हालांकि छावनी परिषद के सीईओ माने अमित कुमार बाबूराव आदि ने इतना जरूर कहा कि वहां लोगों को पूर्व में ही नोटिस देकर अपना कब्जा हटाने के लिए कहा गया था।
घर में है चार बच्चे, कैसे होगा लालन पोषण
मेला क्षेत्र में सेना की कार्रवाई की जद में आए दुकानदार काफी सहमे दिखे। बांध हनुमान मंदिर के पास वर्षों से दुकान लगा रहे दारागंज के शिवानंद ने बताया कि आज पहली बार सेना का उग्र रूप देखने को मिला। हम सभी अपने जवानों का सम्मान करते हैं, लेकिन आज की कार्रवाई में सेना का कुछ अलग ही चेहरा देखने को मिला। उन्होंने कहा कि वर्षों से वह यहां दुकान लगा रहे हैं। पहले भी अभियान चला है लेकिन अभियान के दौरान कुछ ज्यादा ही सख्ती दिखाई गई। उन्होंने कहा कि घर में चार छोटे बच्चे है। अब उनका लालन पोषण कैसे होगा।
मोबाइल तक निकालने की रही मनाही
सेना की कार्रवाई के दौरान कुछ स्नानार्थियों ने वीडियो बनाने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही वहां कोई मोबाइल निकालता वैसे ही सेना के जवान वहां पहुंच कर मोबाइल वापस जेब में रखने को कह देते। कुछ दुकानदारों ने फोटो आदि उतारने की कोशिश भी, लेकिन उसमें अधिकांश असफल ही रहे। जिन लोगों ने सेना की कार्रवाई की फोटो उतारी बाद में उसे सोशल मीडिया में भी शेयर कर दिया।
अभी आगे भी होती रहेगी कार्रवाई
मेला क्षेत्र में सेना की कार्रवाई अभी आगे भी होती रहेगी। सैन्य अफसरों के मुताबिक यह क्षेत्र रक्षा मंत्रालय है। वहां किसी भी तरह का अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। किसी को अगर दुकान आदि लगानी भी है तो वह नियमानुसार अनुमति लेकर ही अपनी दुकानें लगाएं। बताया जा रहा है कि सेना ने कार्रवाई के पूर्व इसकी सूचना जिला प्रशासन के अफसरों को भी दी थी।
शाम तक उजड़ा चमन हो गया संगम क्षेत्र
सुबह के समय संगम क्षेत्र जहां गुलजार था तो वहीं शाम होते-होते यह पूरा क्षेत्र उजड़ा चमन हो गया। एक बारगी देखकर ऐसा लगा कि मानों वहां भूकंप आदि आ गया हो। कीडगंज के विकास गुप्ता जो नियमित रूप से संगम क्षेत्र में भ्रमण के लिए जाते हैं ने बताया कि एक दिन पूर्व संगम क्षेत्र जो पूरी तरह से गुलजार था। वह एक दिन बाद पूरी तरह से उजड़ा-उजड़ा नजर आया। हर तरफ यहां बांस की टट्टर, टीन की चादर आदि सामान बिखरे नजर आए।