प्रयागराज के बाघंबरी गद्दी मठ के आगंतुक कक्ष में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत का राज हमेशा हर किसी के लिए राज ही बनकर रह जाए, इसके लिए हर कदम पर सुबूत मिटाने की कोशिश की गई। इस सनसनीखेज घटना को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। कहा जा रहा है कि इस रहस्यमय मौत की बिसात के पीछे मठ में लगे एचडी कैमरे भी हैं, जो घटना वाले दिन बंद हो गए थे । ऐसे में अपने पहली मंजिल के विश्रामकक्ष से उस प्रतीक्षालय तक महंत कब और कैसे पहुंचे? क्या उस कमरे में पहले से कोई मौजूद था? या फिर उनके आने के बाद कोई वहां दाखिल हुआ? ऐसे सवालों के जवाब ढूंढ पाना मुश्किल हो गया है। क्योंकि, मठ के प्रवेश द्वार से लेकर उस कक्ष तक लगे कैमरों में इस घटनाक्रम से जुड़ी कोई रिकार्डिंग मौजूद नहीं है। इस वजह से सीबीआई के लिए महंत की मौत का सच बाहर लाना अब पत्थर पर दूब उगाने जैसा हो गया है।
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कैमरों के अचानक बंद होने के पीछे मठ के कुछ साधु बिजली जाने की वजह बता रहे हैं, तो यह भी पता चला है कि इन कैमरों से जुड़ी एक डीवीआर मशीन कुछ दिन पहले ही खराब हो गई थी।
अमर उजाला की तफ्तीश में पता चला कि उस दिन बख्शी बांध उपकेंद्र से जुड़े एसपी मालवीय फीडर पर 12:16 से 12:58 बजे तक कुल 42 मिनट तक बिजली आपूर्ति ठप थी। लेकिन, मठ के संतों, सेवादारों का इसके पीछे बिजली जाने का यह बहाना इसलिए भी नहीं माना जा सकता, क्योंकि वहां 63 केवीए क्षमता का जेनरेटर भी लगा है।
इसके अलावा चार किलोवाट का इनवर्टर भी है। ऐसे में फीडर का तार टूटने, शट डाउन लिए जाने से सप्लाई बाधित होने का असर मठ की आपूर्ति पर नहीं पड़ता रहा है।
इस पड़ताल में बाघंबरी मठ में लगे कुल 43 में से 15 ऐसे कैमरे घटना के दिन बंद पाए गए, जो महंत के आराम कक्ष से बाहर आने के बाद भूतल पर जहां शव मिला उस कक्ष से लेकर मठ के मुख्य प्रवेश द्वार तक का बड़ा हिस्सा रिकॉर्ड करते थे।