इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में 23 साल बाद हुए दीक्षांत समारोह में 58 छात्र-छात्राओं को 119 मेडल और 181 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई। इनमें से छह छात्र-छात्राओं को चांसलर मेडल प्रदान किए गए। चांसलर मेडल को छोड़ विश्वविद्यालय मेडल एवं डिग्री पाने वाले तमाम विद्यार्थी समारोह में शामिल नहीं हुए।
विश्वविद्यालय में पिछला दीक्षांत समारोह वर्ष 1996 में हुआ था। बृहस्पतिवार को शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के हाथों मेडल एवं डिग्री पाकर छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से चमक उठे। समारोह की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी को एलएलडी की मानद उपाधि प्रदान की। समारोह की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई। इसके बाद कुलपति ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाईं। इस दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के न्यूज लेटर का विमोचन भी किया गया।
चंद्रशेखर आजाद इंटरनेशनल हॉस्टल की पड़ी नींव
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- फोटो : प्रयागराज
दीक्षांत समारोह के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चंद्रशेखर आजाद इंटरनेशनल हॉस्टल की नींव पड़ी। मुख्य अतिथि कैलाश नाथ सत्यार्थी, उनकी पत्नी सुमेधा सत्यार्थी, विशिष्ट अतिथि केशरीनाथ त्रिपाठी एवं प्रो. रतन लाल हांगलू ने इविवि के नए इंटरनेशनल हॉस्टल की आधारशिला रखी।
डीजीपी की जगह रजिस्ट्रार ने प्राप्त की मानद उपाधि
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दीक्षांत समारोह में केशरी नाथ त्रिपाठी एवं डीजीपी ओपी सिंह को मानद उपाधि प्रदान की जानी थी। केशरी नाथ त्रिपाठी को कुलपति ने मानद उपाधि प्रदान की लेकिन ओपी सिंह समारोह में शामिल नहीं हुए, सो उनकी जगह इविवि के रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने मानद उपाधि प्रदान की।
आजाद, पद्मधर जैसे बनें युवा
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दीक्षांत समरोह के मुख्य अतिथि कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि प्रयागराज की धरती पर आते ही उन्होंने सबसे पहले चंद्रशेखर आजाद के शहादत स्थल पर जाने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने छात्रसंघ भवन के सामने लगी शहीद लाल पद्मधर के प्रतिमा स्थल पर जाकर नमन किया। हो सकता है कुछ लोगों को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति का ऐसे स्थल पर जाना अजीब लगा हो, पर मेरा मानना है कि युवाओं को देशभक्ति सीखनी है तो उन्हें आजाद और पद्मधर जैसा बनना होगा। देशभक्ति की सबसे बड़ी पाठशाला इन्हीं शहीदों के चरणों में है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में 23 साल बाद बृहस्पतिवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के हाथों मेडल और डिग्री पाकर छात्र-छात्राओं के चेहरे खिल उठे। मेडल पाने वालों में कुल 58 नाम थे, जिनमें से 46 विद्यार्थी उपस्थित रहे। इनमें से छह विद्यार्थियों को चांसलर मेडल दिए गए। वहीं, पीएचडी की डिग्री लेने के लिए 181 में से 78 छात्र-छात्राएं समारोह में शामिल हुए। इन्हें भी कैलाश सत्यार्थी ने अपने हाथों से पीएचडी की डिग्री दी। जो 46 विद्यार्थी मेडल लेने समारोह में शामिल हुए, उनमें से एक विद्यार्थी को केवल चांसलर मेडल, पांच को चांसलर के साथ विश्वविद्यालय मेडल और बाकी 40 विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय मेडल मिले। समारोह के दौरान कुल 58 विद्यार्थियों को 119 मेडल दिए जाने थे। मेडल वितरण एवं डिग्री वितरण के दौरान कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू एवं पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी भी मंच पर मौजूद रहे। इससे पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला के नेतृत्व में विद्वत परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्यों की शोभायात्रा नॉर्थ हॉल से सीनेट हॉल पहुंची, जिसका स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. रामेंद्र सिंह ने किया।